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19 प्रसूताओं की मौत के बाद राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, ब्लड बैंक नियम बदले

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जयपुर
प्रदेश में प्रसव के बाद 19 महिलाओं की मौत के मामलों के बाद आखिरकार राजस्थान सरकार ने ब्लड बैंक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकारी अस्पतालों में भर्ती गर्भवती महिलाओं को रक्त चढ़ाने के लिए रिप्लेसमेंट डोनर (बदले में रक्तदाता) लाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

23 जुलाई को जारी हुआ आदेश
राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ने 23 जुलाई को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए सभी सरकारी और निजी ब्लड सेंटरों को नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में एएनसी (Antenatal Care) ले रही गर्भवती महिलाओं, गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं और प्रसव के लिए भर्ती मरीजों पर लागू होगी।

19 मौतों के बाद बदली व्यवस्था
स्था करने में हुई देरी ने मरीजों की स्थिति को और गंभीर बना दिया।
पहले डोनर, फिर खून… अब खत्म होगी देरी

अब तक कई ब्लड बैंकों में मरीज के परिजनों से पहले रिप्लेसमेंट डोनर लाने को कहा जाता था। प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर एनीमिया या सीजेरियन जैसी आपात स्थितियों में यह प्रक्रिया इलाज में देरी का कारण बनती थी। नई व्यवस्था के बाद डॉक्टर जरूरत पड़ते ही तुरंत रक्त उपलब्ध करा सकेंगे।

पहले सिर्फ इन मरीजों को मिलती थी छूट
अब तक बिना रिप्लेसमेंट डोनर रक्त देने की सुविधा केवल थैलेसीमिया, सिकल सेल रोगियों, सड़क दुर्घटना के गंभीर घायलों और 14 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं तक सीमित थी। अब सरकार ने सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रही सभी गर्भवती महिलाओं को भी इस श्रेणी में शामिल कर लिया है।

हर साल एक लाख यूनिट रक्त की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में गर्भवती महिलाओं के इलाज और सुरक्षित प्रसव के लिए हर साल करीब एक लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ब्लड बैंकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ने की संभावना है।

ब्लड बैंकों को दिए गए नए निर्देश
सरकार ने सभी सरकारी और निजी ब्लड बैंकों को स्वैच्छिक रक्तदान अभियान तेज करने, डोनर नेटवर्क मजबूत करने और अधिक से अधिक रक्त संग्रह करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को भी रक्तदान बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा गया है।

मातृ मृत्यु दर घटाने की उम्मीद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के दौरान होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। रिप्लेसमेंट डोनर की बाध्यता हटने से इलाज में देरी नहीं होगी, समय पर रक्त उपलब्ध होगा और मातृ मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिलेगी।

 

Aditya
Author: Aditya

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