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मध्य प्रदेश के सीधी का जल मॉडल बना मिसाल, 1,500 तालाबों की पहल की PM मोदी ने की सराहना

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सीधी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में मध्य प्रदेश के सीधी जिले के जल संरक्षण अभियान का उल्लेख करते हुए इसे जनभागीदारी का प्रेरक उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि जिले में लोगों की सहभागिता से बनाए गए करीब 1,500 तालाबों ने खेती, पेयजल और भूजल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री की इस सराहना से जिले के ग्रामीणों और प्रशासन में उत्साह का माहौल है।

जनसहयोग से बदली पानी की तस्वीर
कुछ वर्ष पहले तक सीधी के कई गांव गर्मियों में जल संकट, पलायन और फसल नुकसान जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। पिछले तीन-चार वर्षों में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मिलकर जल संरक्षण को अभियान का रूप दिया। मनरेगा, जल जीवन मिशन और स्थानीय सहयोग से नए तालाब, स्टॉपडैम और चेकडैम बनाए गए, जबकि पुराने जलाशयों का पुनर्जीवन किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि आज अधिकांश गांवों में वर्षभर पानी की उपलब्धता बनी हुई है।

खेती, वन्यजीव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला लाभ
जिला प्रशासन के अनुसार जल संरक्षण कार्यों से 15 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ी है, जिससे रबी फसलों का उत्पादन भी बढ़ा है। मवेशियों के लिए पानी की समस्या कम हुई है। संजय-डुबरी टाइगर रिजर्व से लगे इलाकों में जंगल के बाहर जल स्रोत विकसित होने से वन्यजीवों का गांवों की ओर आना घटा है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी दर्ज की गई है।

गांवों ने संभाली तालाबों की जिम्मेदारी
कलेक्टर विकास मिश्रा ने बताया कि प्रत्येक तालाब के रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय समितियों को सौंपी गई है। ग्रामीण स्वयं गाद निकालने, घेराबंदी और संरक्षण का कार्य करते हैं। कई स्थानों पर महिलाओं के स्वयं सहायता समूह तालाबों के किनारे सब्जी उत्पादन और पौधारोपण कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। यही जनभागीदारी सीधी के जल संरक्षण मॉडल की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।

Aditya
Author: Aditya

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