जबलपुर/वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रेलवे के वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक (सीनियर DMM) को कथित रिश्वत प्रकरण में सीबीआई द्वारा हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई के बाद मध्य प्रदेश के जबलपुर रेल मंडल में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वाराणसी में एक फर्नीचर कारोबारी की शिकायत पर सीबीआई ने संबंधित अधिकारी के कार्यालय और आवास पर छापेमारी कर उन्हें हिरासत में लिया तथा मोबाइल, लैपटॉप और कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं। आरोप है कि बिल पास कराने के एवज में ₹1.70 लाख की रिश्वत ली गई थी।
इधर, जबलपुर रेल मंडल के कुछ ठेकेदारों का दावा है कि यहां भी कार्यों के भुगतान, बिल पास कराने और अन्य प्रक्रियाओं में कथित रूप से कमीशन एवं अवैध भुगतान का दबाव बनाया जाता है। ठेकेदारों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों के कारण कई विकास कार्य प्रभावित होते हैं और भुगतान में अनावश्यक देरी होती है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में ठेकेदार यूनियन ने इस संबंध में आवाज उठाने का प्रयास किया था, लेकिन अधिकांश ठेकेदार खुलकर शिकायत करने से बचते रहे। उनका कहना है कि कार्रवाई या अन्य प्रतिकूल प्रभाव की आशंका के कारण कोई सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
वहीं, अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि कुछ ठेकेदार कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य एकत्र कर रहे हैं। यदि पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध होते हैं तो संबंधित जांच एजेंसियों, जिनमें सीबीआई जैसी एजेंसियां भी शामिल हो सकती हैं, को औपचारिक शिकायत सौंपी जा सकती है।
हालांकि, जबलपुर रेल मंडल के संबंध में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल ठेकेदारों और सूत्रों के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।









