Edition

36 दिन आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्रालय संभालेंगे प्रह्लाद जोशी, सामने बड़ी चुनौतियां

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली
कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों के 36 दिनों के आंदोलन के बाद शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को दी गई है। उन्होंने रविवार को शिक्षा मंत्री का पद संभाल लिया है। इस मौके पर उन्होंने अधिकारियों के साथ संक्षिप्त बैठक भी की। प्रह्लाद जोशी के पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी बनी रहेगी। उनके पास फिलहाल नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भी है।

बीजेपी में अनुभवी नेता के तौर पर पहचान
बता दें कि बीजपी में प्रह्लाद जोशी काफी अनुभवी नेता के तौर पर पहचान रखते हैं। इसके अलावा संसद की कार्यवाही के दौरान भी वह काफी सक्रिय रहते हैं। वह लंबे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे हैं। ऐसे में संगठन में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। प्रह्लाद जोशी ने अपनी राजनीति की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ जिले से की ती। उन्होंने यहां पार्टी के लिए जमकर काम किया और उन्हें इसका इनाम 2004 के आम चुनाव में मिला।

पांच बार के सांसद प्रह्लाद जोशी
2004 में पहली बार प्रह्लाद जोशी धारवाड़ से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद लगातार पांच चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की। प्रह्लाद जोशी पिछले 22 साल से लोकसभा सांसद हैं। पांच बार विजय हासिल करने की वजह से उनकी गिनती कर्नाटक के काफी लोकप्रिय और प्रभावशाली नेताओं में होती है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का भी संभाल चुके हैं जिम्मा
जानकारों का कहना है कि प्रह्लाद जोशी के कंधे यह जिम्मेदारी बीजेपी ने काफी सोच-समझकर डाली है। वह 2012 में कर्नाटक में बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2014 के बाद उन्हें लोकसभा में अलग-अलग संसदीय समितियों का अध्यक्ष बनाया गया। वहीं 2019 में उन्होंने संसदीय कार्य, कोयल और खनन मंत्रालय का जिम्मा संभाला। तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।

नए शिक्षा मंत्री के आगे कई चुनौतियां
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इतने बड़े आंदोलन के बाद नए शिक्षा मंत्रालय के सामने चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। इसके अलावा छात्रों को उनसे उम्मीदें भी ज्यादा हैं। उनके सामने नई शिक्षा नीति को ठीक से लागू करने, आगे की सभी परीक्षाओं को ठीक से संपन्न करवाने, सीबीएसई और एनसीईआरटी में बदलाव करे की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा उन लूप होल्स को भी पता लगाना होगा जहां से पेपर लीक की संभावना होती है।

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि NEET -UG परीङा में बड़ा बदलाव किया जा सकता है। अगले साल यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और एससे पहले एनटीए के ढांचे में भी बड़ा परिवर्तन किया जा सकता है। यह भी चर्चा चल रही है कि परीक्षा दो चरणों में करवाई जाए जिससे किसी तरह की गड़बड़ की संभावनाएं खत्म हो जाएं।

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!