सतना। शहर में नगर निगम की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भरहुत नगर, धवारी और आसपास के कई इलाकों में घरों के नलों से कीड़ों वाला दूषित पानी आने की शिकायतें सामने आई हैं। गंदे पानी की आपूर्ति से नागरिकों में डायरिया, टाइफाइड, पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।

निजी जल स्रोत नहीं होने से बढ़ी मुश्किल,जिन परिवारों के पास निजी बोरवेल या अन्य वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध नहीं हैं, वे पूरी तरह नगर निगम की जलापूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में दूषित पानी मिलने से उनके सामने सुरक्षित पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवार मजबूरी में बाजार से पानी खरीदने या दूसरे स्रोतों से पानी की व्यवस्था करने को विवश हैं।

स्काडा प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल,स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से लागू किए गए स्काडा (SCADA) प्रोजेक्ट के बावजूद शहर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण जलापूर्ति व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो जलजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है।
पार्षद का आरोप- एक साल से बनी हुई है समस्या,क्षेत्र के पार्षद पंकज कुशवाहा ने बताया कि पिछले लगभग एक वर्ष से दूषित पानी की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार नगर निगम आयुक्त और महापौर को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

उन्होंने जलापूर्ति व्यवस्था की तकनीकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।

महापौर ने बताई समस्या की वजह,महापौर योगेश ताम्रकार ने बताया कि एनीकेट में पानी की कमी के कारण फिल्टर प्लांट में पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। उनके अनुसार पानी को शुद्ध करने के लिए एलम (फिटकरी) की मात्रा बढ़ानी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप शुद्धिकरण नहीं हो पा रहा था।
उन्होंने बताया कि अब बाणसागर का पानी एनीकेट तक पहुंच चुका है और हाल की बारिश से जलस्तर में भी वृद्धि हुई है। उनका दावा है कि अगले एक-दो दिनों में शहर में स्वच्छ और नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी के सेवन से डायरिया, टाइफाइड, पीलिया, हैजा और पेट संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने नागरिकों से पानी उबालकर या फिल्टर करने के बाद ही पीने की अपील की है। यदि पानी में कीड़े, गंदगी या दुर्गंध दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को देने की सलाह दी गई है।









