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छत्तीसगढ़ में CJP आंदोलन पर सियासत तेज! डिप्टी CM अरुण साव ने छात्रों की पहचान पर उठाए सवाल

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रायपुर
छत्तीसगढ़ के डेप्युटी सीएम अरुण साव ने शुक्रवार को नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया कि इसमें हिस्सा लेने वाले लोग असली स्टूटेंड नहीं लगते बल्कि पॉलिटिक्ल पार्टियों के भेजे हुए लोग हैं।

असली स्टूडेंट अपनी पढ़ाई पर फोकस कर रहे
उन्होंने दिल्ली और रायपुर में हो रहे प्रदर्शनों पर कहा कि असली स्टूडेंट अपनी पढ़ाई पर फोकस कर रहे हैं, जबकि प्रोटेस्ट करने वाले पॉलिटिकल रूप से मोटिवेटेड लग रहे हैं।

असली स्टूडेंट नहीं हैं ये लोग
डेप्युटी सीएम अरुण साव ने कहा कि आंदोलन में हिस्सा लेने वाले असली स्टूडेंट नहीं लगते। ऐसा लगता है कि उन्हें पॉलिटिकल पार्टियों ने भेजा है। जो स्टूडेंट पढ़ रहे हैं, वे अपनी पढ़ाई में बिजी हैं। डेलीगेशन की बात सुन ली गई है और सभी को डिसिप्लिन में अपनी बात रखनी चाहिए।

दरअसल, सीजेपी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। वह कथित नीट पेपर लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। साथ ही परीक्षा सिस्टम में भी सुधार करने की बात कर रहे हैं। पार्टी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों का आरोप लगाया है और सरकार पर ज्यादा जवाबदेही के लिए दबाव डाल रही है।

लोकतंत्र और राजनीतिक मर्यादाओं का कर रही अपमान-साव

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने लोकतंत्र और राजनीतिक मर्यादाओं केार में विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र संवाद और संविधान से चलता है, अराजकता से नहीं।लोकतंत्र और राजनीतिक मर्यादाएंसंवैधानिक सम्मान: अरुण साव का कहना है कि लोकतंत्र की ताकत देश का संविधान और जनता का जनमत है, न कि दबाव की राजनीति।

अराजकता का विरोध: राजनीतिक विरोध के नाम पर मर्यादाओं को तोड़ने और लोकतांत्रिक परंपराओं को ठेस पहुंचाने वाले कृतियों की उन्होंने कड़ी निंदा की है।विपक्ष पर हमला: कांग्रेस पार्टी पर लोकतांत्रिक मूल्यों की दुहाई देती है, लेकिन उनके कार्य इसके विपरीत रहे हैं।

राहुल गांधी के अराजक आंदोलन पर डिप्टी सीएम अरुण साव का प्रहार

राहुल गांधी ने देश में अराजकता फैलाने का कुत्सित प्रयास किया : डिप्टी सीएम अरुण साव
लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन अराजकता का नहीं। राहुल गांधी जी द्वारा आंदोलन के नाम पर संसद की गरिमा को ठेस पहुँचाना और स्वयं को देश से ऊपर समझना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। राहुल गांधी ने अराजकता फैलाने का जनता को भड़काने का कुत्सित प्रयास किया।

कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज
इसके साथ ही साव कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर कोई गुटबाजी नहीं है। अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस को अपनी अंदरूनी पॉलिटिक्स बीजेपी पर थोपनी चाहिए। कांग्रेस में अंदरूनी लड़ाई होती है, जबकि रेगुलर ऑर्गेनाइजेशन मीटिंग बीजेपी के कामकाज का एक रूटीन हिस्सा हैं।

गौरतलब है कि छात्रों के आंदोलन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई फैसले लिए हैं। केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए सरकार बिल लेकर आ रही है।

Aditya
Author: Aditya

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