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एक पेड़ पर तीन स्वाद, बूढ़े आम में सफल हुई अल्फांसो और मियाजाकी की ग्राफ्टिंग

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80 साल पुराने आम के पेड़ को मिला नया जीवन, एक ही तने पर फलेंगे अल्फांसो, मियाजाकी समेत 11 किस्मों के आम…..सतना। मझगवां तहसील के खुटहा गांव में लगभग 80 वर्ष पुराने एक देशी आम के पेड़ पर किया जा रहा अनोखा उद्यानिकी प्रयोग चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि यह पूरी तरह सफल रहा तो विंध्य क्षेत्र में अपनी तरह का यह पहला उदाहरण होगा, जहां एक ही पेड़ पर देशी किस्मों के साथ दुनिया की प्रीमियम आम प्रजातियां अल्फांसो (हाफूस) और मियाजाकी समेत 11 किस्मों के आम फलेंगे।


यह प्रयोग ऑर्चर्ड रेजुवेनेशन (Orchard Rejuvenation) और मल्टी-वैरायटी ग्राफ्टिंग तकनीक के माध्यम से किया जा रहा है। इसकी निगरानी पादप अनुवांशिकी के जानकार एवं मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह के मार्गदर्शन में की जा रही है।
खुटहा निवासी कृष्ण केशव त्रिपाठी ने बताया कि यह पेड़ उनके दादा स्वर्गीय शोभनाथ शास्त्री ने करीब 80 वर्ष पहले लगाया था। वर्ष 2021 में आकाशीय बिजली गिरने से इसका मुख्य तना दो हिस्सों में विभाजित हो गया था। परिवार ने रस्सियों की सहायता से तने को बांधकर पेड़ को बचाए रखा, लेकिन उम्र बढ़ने के कारण इसकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी।
फरवरी से शुरू हुआ कायाकल्प
पेड़ को नया जीवन देने के लिए फरवरी माह में, जब आम का पेड़ सुप्तावस्था में होता है, इसकी अधिकांश पुरानी शाखाएं हटाकर केवल मुख्य तना सुरक्षित रखा गया। कैनोपी क्षेत्र में खाई खोदकर जैविक खाद एवं पोषक तत्व डाले गए, नियमित सिंचाई की गई तथा तने पर फफूंदनाशी और कीटनाशी लेप लगाया गया। उपचार के बाद मई माह में पेड़ पर नई कोपलें निकलनी शुरू हो गईं, जिससे इसके पुनर्जीवित होने के संकेत मिले।
11 किस्मों की सफल ग्राफ्टिंग
7 जुलाई को वरिष्ठ उद्यान अधिकारी मोहन सिंह मरावी ने एसडीएम महिपाल सिंह के मार्गदर्शन में नई कोपलों पर ग्राफ्टिंग की। इस दौरान सुंदरजा, आम्रपाली, मल्लिका, बॉम्बे ग्रीन, लंगड़ा, दशहरी, मालदा, केसर, सीपिया, खुमानी और बारहमासी सहित 11 किस्मों की बड स्टिक लगाई गई। सभी ग्राफ्ट सुरक्षित हैं और तेजी से विकसित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सभी ग्राफ्ट सफल रहे तो आने वाले वर्षों में यह एक ही पेड़ विभिन्न स्वाद, रंग और गुणवत्ता वाले आमों से लद जाएगा। यह प्रयोग न केवल पुराने फलदार पेड़ों के संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा, बल्कि विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकता है।

Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

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