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रीवा के रौली गांव में विकास की तस्वीर,लकड़ी-रस्सी के पुल से जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण

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रीवा। जिले की ग्राम पंचायत रौली में वर्षों से पक्के पुल की मांग पूरी नहीं होने के कारण ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि गांव के लोगों ने अपने श्रमदान से लकड़ी और रस्सियों की मदद से एक अस्थायी पुल तैयार कर लिया है, जिसके सहारे स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, किसान और अन्य ग्रामीण प्रतिदिन नदी पार करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में यह अस्थायी पुल बेहद खतरनाक साबित होता है। तेज बहाव और फिसलन के बीच इसी पुल से बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है, किसान खेतों तक पहुंचते हैं और ग्रामीण अपने रोजमर्रा के कामकाज के लिए नदी पार करते हैं। बावजूद इसके, उनके पास कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने पक्के पुल की मांग रखी जा रही है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। मजबूरी में गांव के लोगों ने स्वयं श्रमदान कर लकड़ी और रस्सियों का पुल बनाया, ताकि आवागमन पूरी तरह बंद न हो।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो बरसात के दौरान कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन और शासन से तत्काल पक्का पुल स्वीकृत कर निर्माण शुरू कराने की मांग की है, ताकि गांव के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

रेवांचल रोशनी,साहस सच कहने का

Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

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