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लाइट पॉल्यूशन का खतरा बढ़ा, भारत में 50% लोग कृत्रिम रोशनी के असर से प्रभावित

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इंदौर 

आर्टिफिशियल रोशनी की वजह से दुनिया का 80% हिस्सा प्रभावित है। 2014 से 2022 के बीच दुनिया में रात के समय आर्टिफिशियल रोशनी में लगभग 16% वृद्धि हुई। क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप प्राणा एयर के मुताबिक भारत की 50% से अधिक आबादी हर रात आर्टिफिशियल रोशनी से होने वाले प्रदूषण का सामना करती है।

बड़े शहरों की रातें 60 गुना ज्यादा चमकीली हो चुकी हैं। इंसानों, कीटों, जानवरों और पक्षियों पर भी इसका असर हो रहा है।

इंसानों की नींद, फूल खिलने, पक्षियों के प्रजनन पर असर
प्रकाश प्रदूषण पशु-पक्षियों में प्रवास, प्रजनन, घोंसला बनाने और अंडों से बच्चे निकलने जैसी कई जैविक प्रक्रियाओं को बदल देता है।

कई रात्रिकालीन कीट विलुप्त हो रहे हैं। इंसानों की आंखों की रोशनी और नींद के साइकिल पर भी असर पड़ रहा है। रात में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर घट रहा। इससे डायबिटीज, डिप्रेशन, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसे रोग बढ़ने का जोखिम।

चेक रिपब्लिक में स्ट्रीट लाइट ऊपर दिखी तो 3 लाख जुर्माना
चेक रिपब्लिक में स्ट्रीटलाइट्स को केवल जमीन पर फोकस नहीं करने पर 3 लाख रुपए से ज्यादा जुर्माना लग सकता है। फ्रांस में रात 1 बजे के बाद दुकानों, दफ्तरों की बाहरी लाइट बंद करना जरूरी। तीन हजार केल्विन से ज्यादा नहीं लगा सकते।

जर्मनी में रिहायशी इलाकों में रात 10 बजे के बाद तेज रोशनी प्रतिबंधित की गई है।

Aditya
Author: Aditya

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