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स्मार्ट मीटरों में नई गड़बड़ी, रियल टाइम बिजली खपत की जानकारी हुई बं

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लखनऊ
 उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटर में नई गड़बड़ी आ गई है। राज्य भर में पौने दो लाख स्मार्ट मीटर संचार से ही बाहर हो गए हैं। इन मीटरों का केंद्रीय प्रणाली से डाटा का आदान-प्रदान नहीं हो पा रहा। ऐसे में 1 लाख 73 हजार 163 स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं को वास्तविक समय में बिजली की खपत की भी जानकारी नहीं हो पा रही है। राज्य में अब तक 92.90 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में मीटरों का संचार नेटवर्क से बाहर होने पर सवाल उठ रहे हैं।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर लगाने की परियोजना की समीक्षा करवाने और मीटर लगाने वाली कंपनियों को तय समय में इस दिक्कत को दूर करवाने का आदेश देने की मांग की है। स्मार्ट मीटर परियोजना का मूल उद्देश्य रियल-टाइम डेटा, सटीक बिलिंग, पारदर्शिता और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार बताया गया था। ऐसे में अब 1.73 लाख स्मार्ट मीटरों के संचार नेटवर्क से बाहर होने से इस परियोजना के उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

पावर कारपोरेशन को नुकसान और ग्राहकों पर असर की आशंका
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इससे राजस्व प्रबंधन, बिलिंग, तकनीकी निगरानी और उपभोक्ता शिकायतों के समाधान में दिक्कत आएगी। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है और अगर इसे दुरुस्त नहीं किया जा सकता तो इस परियोजना को बंद कर देना चाहिए अन्यथा पावर कॉरपोरेशन को नुकसान होगा और इसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

हर डिस्कॉम की तय हो जवाबदेही
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि पावर कॉरपारेशन पूरी स्मार्ट मीटर परियोजना की स्वतंत्र व तकनीकी जांच करवाए। हर डिस्कॉम और मीटर लगाने वाली कंपनियों की जवाबदेही तय की जाए। परिषद ने मांग की है कि पावर कॉरपोरेशन यह भी स्पष्ट करे कि मीटरों के संचार नेटवर्क से बाहर होने की क्या वजह है। स्मार्ट मीटर परियोजना की सफलता का आकलन केवल इससे नहीं हो सकता कि कितनी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। परियोजना की सफलता मीटरों के प्रभावी, निर्बाध और विश्वसनीय संचालन से तय होगी।

विरोध के बाद प्रीपेड से पोस्ट पेड हुए है स्मार्ट मीटर
यूपी में बिना ग्राहकों की मंजूरी के ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा दिए गए थे। इससे लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बैलेंस अचानक खत्म होने पर बिजली गुल होने और रिचार्ज के बाद भी बिजली नहीं आने से लोग परेशान होने लगे। जिले-जिले में इसका विरोध शुरू हो गया। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों का आक्रोश देख सरकार बैकफुट पर आई और प्रीपेड मीटरों को पोस्ट पेड मोड में किया गया। अब हर महीने की दस तारीख तक बिल जनरेट होता है और अगले 15 दिन में बिल जमा करने का मौका मिल रहा है।

Aditya
Author: Aditya

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