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मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव जल्द कराने की मांग, सचिन दवे ने उठाई आवाज

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भोपाल
मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों व विश्वविद्यालययों में छात्रसंघ चुनावों की प्रासंगिकता और उनका महत्व आज हमारे समाज और लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंतन का विषय है, छात्र संघ चुनाव की मांग रखते हुए विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कार्य परिषद सदस्य, शिक्षाविद, छात्र नेता सचिन दवे ने बताया कि यह केवल किसी राजनीतिक दल का मामला नहीं है, बल्कि युवाओं की नेतृत्व क्षमता, लोकतांत्रिक समझ और भविष्य की जिम्मेदारियों से जुड़ा है। लोकतंत्र केवल संसद या सचिवालय तक सीमित नहीं है; इसकी असली जड़ें वहीं हैं, जहाँ युवा पहली बार अपने विचार व्यक्त करना सीखता है, किसी विषय से सहमति अथवा असहमति दिखाता है और अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करता है। महाविद्यालय इस प्रक्रिया का पहला और महत्वपूर्ण मंच हैं।

 मध्य प्रदेश में 2017 के बाद से ही  महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव स्थगित चल रहे हैं। इसका सीधा असर छात्रों की समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व विकास पर पड़ा है। छात्रसंघ चुनाव केवल वोट देने की प्रक्रिया नहीं हैं; यह युवाओं के लिए नेतृत्व सीखने, बहस करने और जवाबदेही समझने का पहला अवसर हैं।उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में ही देख जाए तो पिछले दो दशकों में जनप्रिय रहे मुख्यमंत्री चाहे वो श्री शिवराजसिंह चौहान हो या डॉ. मोहन यादव हों दोनों ही लोकतंत्र की नर्सरी के प्रभावी छात्रनेता रहे हैं, वहां हुआ नेतृत्व क्षमता का विकास कहीं न कहीं आज भी उनके व्यक्तित्व में साफ झलकता है। इसके साथ ही प्रदेश के कई मंत्री, विधायक, सांसद महाविद्यालय या विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से ही उभरकर सामने आये हैं।  

नेतृत्व के संदर्भ में आज एक खतरनाक प्रवृत्ति दिख रही है—नेतृत्व को जन्मसिद्ध या वंशानुगत अधिकार माना जा रहा है, जैसा कि देश में कई जगह चल रही परिवारवाद की राजनीति में देखा जा रहा है। यह सोच लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। ऐसे में  छात्र संघ चुनाव की महत्वता और अधिक बढ़ जाती है।

उल्लेखनीय हैं की, श्री सचिन दवे जाने माने शिक्षाविद, प्रख्यात छात्रनेता, पूर्व छात्र संघ सीनेट सेक्रेटरी पीजी कॉलेज धार एवं सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व कार्य परिषद सदस्य हैं। जो शिक्षा क्षेत्र में विगत 26 वर्षों से सक्रीय है। श्री दवे ने कहा की मध्यप्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि मध्यप्रदेश में लिंगदोह समिति की सिफारिशें लागु करते हुए करते हुए शीघ्र प्रत्यक्ष तरीके से छात्र संघ चुनाव शीघ्र कराये जाए ताकि प्रदेश में सक्षम युवा नेतृत्व स्वाभाविक रूप से उभरकर सामने आ सके।
                     

Aditya
Author: Aditya

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