अब धुएं से निकलेगा ऑक्सीजन? 18 वर्षीय दो छात्रों का दावा, बनाया अनोखा ‘गो ग्रीन फिल्टर’
पेंसिल्वेनिया (अमेरिका)। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया के दो 18 वर्षीय छात्रों, रोहन कपूर और जैक रीशर्ट ने एक नई तकनीक विकसित करने का दावा किया है। दोनों ने ‘गो ग्रीन फिल्टर’ (Go Green)
नामक एक छोटा और कम लागत वाला उपकरण तैयार किया है, जिसे किसी भी कार के साइलेंसर (टेलपाइप) पर लगाया जा सकता है।
छात्रों के अनुसार, यह डिवाइस जीवित माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) तकनीक पर आधारित है। वाहन से निकलने वाला धुआं और कार्बन डाइऑक्साइड फिल्टर से गुजरते समय माइक्रोएल्गी प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) की प्रक्रिया के जरिए प्रदूषक तत्वों को अवशोषित करने का प्रयास करती है, जिससे ऑक्सीजन बनने में सहायता मिलती है।
निर्माताओं का कहना है कि इस फिल्टर को तैयार करने में लगभग 50 अमेरिकी डॉलर (करीब ₹4,200) का खर्च आता है। उनका दावा है कि शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक से वाहनों के उत्सर्जन में 74 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन दावों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण और व्यापक समीक्षा अभी आवश्यक है। फिलहाल यह तकनीक शुरुआती चरण में है और इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन आगे के शोध के बाद ही संभव होगा।
यदि भविष्य में यह तकनीक बड़े पैमाने पर प्रभावी साबित होती है, तो यह दुनिया के प्रदूषित शहरों में वायु प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।









