विशेषज्ञ बोले— केवल जनसंख्या नहीं, संसाधनों का प्रबंधन और मानव विकास तय करेगा देश का भविष्य।

भारत में प्रतिदिन लगभग 90 हजार बच्चों के जन्म का अनुमान एक बार फिर जनसंख्या वृद्धि को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। बढ़ती आबादी को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, पेयजल, खाद्य सुरक्षा और अन्य बुनियादी संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल अधिक जन्म दर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि भारत “विनाश की ओर” बढ़ रहा है। किसी भी देश का भविष्य उसकी जनसंख्या की संख्या से अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर और कौशल विकास उपलब्ध करा पाता है या नहीं।
भारत दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में बढ़ती जनसंख्या के साथ सतत विकास, संसाधनों का संतुलित उपयोग, प्रभावी जननीतियां और मानव संसाधन का बेहतर विकास आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी चुनौतियों और प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
जनसंख्या वृद्धि को चुनौती के साथ-साथ अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है, यदि देश अपनी युवा आबादी को सही दिशा, शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने में सफल होता है।
— रेवांचल रोशनी।साहस सच कहने का









