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जगन्नाथ मंदिर को ‘धाम’ कहने पर विवाद, पुरी पुजारियों ने उठाए सवाल

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नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल के 'दीघा' में जगन्नाथ स्वामी की पत्थऱ की मूर्ति और 'धाम' कहे जाने को लेकर विवाद शुरू से ही चला आ रहा है। वहीं रथ यात्रा के बीच पुरी जगन्नाथ मंत्री के प्रमुख पाणिग्रही, जगन्नाथ दैतापति ने कहा कि ममता बनर्जी को इतना घमंड था कि उन्होंने उनकी सलाह नहीं मानी। एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान दैतापति ने कहा कि उनका किसी भी पार्टी से लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, मैं वही सलहा दे रहा था जो कि शास्त्रगत है। मुझे 'दीघा धाम' शब्द पर आपत्ति थी। मंदिर कहीं भी बनाया जा सकता है लेकिन उसे धाम नहीं कहा जा सकता।

दैतापति ने कहा, ममता बनर्जी ने मेरी सलाह नहीं मानी। उन्होंने दीघा के साथ धामलिखा और पत्थर की मूर्ति की स्थापना कर दी। जबकि केवल पुरी को ही जगन्नाथ धाम कहा जा सकता है। देश में जगन्नाथ स्वामी के हजारों मंदिर होंगे लेकिन उन्हें धाम नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, भगवान किसी के घमंड को बर्दाश्त नहीं करते। इसीलिए बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार उखाड़ फेंकी गई।

दैतापति ने की शुभेंदु अधिकारी की तारीफ
बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ करते हुए दैतापति ने कहा कि सरकार बनने के बाद ही उन्होंने दीघा से धाम शब्द हटाया। शुभेंदु हमारे शिष्य हैं और उन्होंने वही किया जो सही था। बता दें कि कई धर्मगुरु कह चुके हैं कि दीघा के साथ धाम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा जगन्नाथ स्वामी की मूर्ति लकड़ी की ही बनाई जानी चाहिए। इसे पत्थर का नहीं बनाया जाना चाहिए।

इससे पहले पुरी के मुख्य पुजारी राजेश दैतापति ने कहा दीघा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान इसकी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि पुरी मंदिर द्वारा कहा गया था कि धर्म शास्त्र के अनुसार ही किसी पवित्र मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए। लेकिन ममता बनर्जी की सरकार ने उनकी एक भी नहीं मानी। इसके अलावा दैतापति भवानी दास ने कहा था, मंदिर बनाना पुण्य का काम है। लेकिन धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। कोई भी मंदिर बनाने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन धाम सिर्फ चार हैं और पांचवां नहीं हो सकता। उन्होंने कहा था कि दीघा एक सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र हो सकता है।

दैतापति भवानी दास ने कहा था कि ममता बनर्जी ने महाप्रभु की पत्थऱ की मूर्ति बना दी जो कि धर्म विरुद्ध है। भगवान जगन्नाथ की मूर्ति लकड़ी की ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा था, ओडिशा में भी इसी तरह का अधर्म हुआ था और अब पश्चिम बंगाल में हुआ है। उसका परिणाम आप लोगों के सामने है। भगवान को लेकर कभी राजनीति नहीं करनी चाहिए।

मई 2025 में हुई थी दीघा में स्थापना
दीघा में मई 2025 में भगवान जगन्नाथ की स्थापना की गई थी। पुरी मंदिर के तर्ज पर ही यहां मंदिर बनवाया गया था। कहा जा रहा था कि हिंदुओं का वोट बटोरने के लिए यह मंदिर बनाया गया है। इसको लेकर विवाद तभी से शुरू हो गया था।

Aditya
Author: Aditya

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