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मध्य प्रदेश भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन की रणनीति, नए चेहरों पर बढ़ा भरोसा और युवाओं को मिली अहम जिम्मेदारी

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भोपाल
भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में राज्यसभा से लेकर दतिया उपचुनाव तक पीढ़ी परिवर्तन का संदेश दिया है। राज्यसभा भेजे गए रजनीश अग्रवाल मौजूदा राजनेताओं में तीसरी पीढ़ी के हैं। दूसरे राज्यसभा सदस्य महेश केवट भी लगभग 52 वर्ष के हैं। अब दतिया उपचुनाव में 51 वर्ष के आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है।

जमीनी कार्यकर्ताओं पर जताया भरोसा
ये तीनों ही नए चेहरे हैं और 55 वर्ष से कम आयु के हैं। सभी की पृष्ठभूमि संघ से जुड़ी रही है। तरुण चुघ को छोड़ दें तो मध्य प्रदेश से आशुतोष तिवारी, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट जमीनी कार्यकर्ता हैं, न कोई पॉलिटिकल एप्रोच और न ही दावेदारी। काम और पार्टी के प्रति समर्पण की बदौलत उम्मीदवार बनाए गए। इससे राष्ट्रीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युवाओं और समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्व मिलेगा।

दिग्गजों के बीच नई पीढ़ी को मौका
मध्य प्रदेश में भाजपा ने 1990 दौरान आई पीढ़ी अब भी राजनीति में सक्रिय है। शिवराज सिंह चौहान से लेकर कैलाश विजयवर्गीय तक दिग्गज नेता इनमें शामिल हैं। इसके बाद की पीढ़ी में विष्णु दत्त शर्मा से लेकर डा. मोहन यादव जैसे चेहरे हैं। अब पार्टी ने फिर नई पीढ़ी के लोगों को आगे बढ़ाना आरंभ कर दिया है। इस बड़े कदम ने प्रदेश के कई दिग्गज और वरिष्ठ नेताओं के सामने एक लकीर भी खींच दी है।

दतिया में विरोध के बावजूद संगठन का स्पष्ट संदेश
पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि अब चुनाव जीतने की क्षमता, साफ छवि और संगठन के प्रति वफादारी ही सर्वोपरि होगी। दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के विरोध प्रदर्शन और कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे के बावजूद, पार्टी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश संगठन ने स्पष्ट किया है कि पूरी पार्टी एकजुट होकर आशुतोष तिवारी को चुनाव जिताने के लिए मैदान में उतर गई है। यह 'पीढ़ी परिवर्तन' मध्य प्रदेश में आने वाले समय के लिए भाजपा की एक नई और युवा लीडरशिप की नींव रख रहा है।

बिना गुटीय राजनीति के लगातार पार्टी का काम करते रहे रजनीश, महेश व आशुतोष
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर उप चुनाव के उम्मीदवार बनाए गए आशुतोष तिवारी भाजपा के बेहद पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता हैं। वह भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री रह चुके हैं और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन (कैबिनेट मंत्री दर्जा) के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मूल रूप से ग्वालियर-चंबल अंचल के रहने वाले तिवारी एक सीधे और साफ छवि के संगठन निष्ठ नेता माने जाते हैं।

मुलाकात, बोले- यह तय हो गया मेरा कद बड़ा नहीं, पार्टी बहुत ऊपर
इससे ठीक पहले, जून 2026 में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने मध्य प्रदेश के पारंपरिक दिग्गजों को दरकिनार कर दो नए चेहरों- रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को राज्य सभा चुनाव लड़ाकर उच्च सदन में भेजा। रजनीश अग्रवाल ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना कैरियर आरंभ किया था। भाजपा के प्रदेश मंत्री और लंबे समय तक पार्टी के प्रवक्ता रहे हैं। उनकी छवि एक प्रखर वक्ता और संगठन के समर्पित रणनीतिकार की रही है, जो बिना किसी गुटीय राजनीति के लगातार पार्टी का काम करते रहे।

इसी तरह मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रहे महेश केवट को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संदेश दिया। केवट समाज से आने वाले महेश केवट बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और बुंदेलखंड अंचल में जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे हैं।

Aditya
Author: Aditya

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