क्या किसी बड़े संस्थान की वजह से अटका मामला? चर्चाएं तेज………
चित्रकूट। देश के प्रमुख धार्मिक तीर्थों में शामिल चित्रकूट धाम में वर्षों से सिविल अस्पताल की मांग उठती रही है, लेकिन आज तक यह मांग धरातल पर नहीं उतर सकी।
स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कई बार प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, तत्कालीन मुख्यमंत्री, वर्तमान उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री सहित अन्य मंत्रियों ने भी यहां सिविल अस्पताल बनाने का आश्वासन दिया, लेकिन हर बार मामला फाइलों तक सीमित रह गया।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि चित्रकूट में सप्ताह में कई दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान कामतानाथ के दर्शन, परिक्रमा और अन्य धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। अमावस्या जैसे विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी रहती है। नगर परिषद सहित आसपास की पांच पंचायतों की आबादी और तीर्थ यात्रियों को मिलाकर स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि इतनी बड़ी आबादी और श्रद्धालुओं की संख्या के बावजूद चित्रकूट में केवल एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, जहां सीमित संसाधन और चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में यदि कोई बड़ा हादसा, भगदड़ या सामूहिक दुर्घटना हो जाए तो गंभीर मरीजों के उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि आखिर सिविल अस्पताल की फाइलें बार-बार क्यों रुक जाती हैं? क्षेत्र के कुछ समाजसेवियों और नागरिकों का आरोप है कि एक प्रभावशाली निजी संस्थान के दबाव के कारण सिविल अस्पताल की योजना आगे नहीं बढ़ पाती। उनका कहना है कि जैसे ही प्रक्रिया आगे बढ़ती है, फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, और न ही संबंधित संस्थान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
जनता का कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई नहीं है तो सरकार और संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर वर्षों से अस्पताल निर्माण में वास्तविक बाधा क्या है।
यदि कोई प्रशासनिक, वित्तीय या भूमि संबंधी समस्या है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
चित्रकूट जैसे विश्वविख्यात तीर्थ में आधुनिक सिविल अस्पताल की आवश्यकता अब केवल स्थानीय लोगों की मांग नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है। क्षेत्रवासियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि अस्पताल निर्माण की पूरी स्थिति सार्वजनिक करते हुए परियोजना को शीघ्र मंजूरी देकर कार्य प्रारंभ कराया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें……..









