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24 घंटे में गिरफ्तारी, 30 दिवस में विवेचना पूर्ण एवं प्रभावी अभियोजन से 8 माह में दोषसिद्धि

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भोपाल

महिलाओं, बालिकाओं एवं दिव्यांगजनों के विरुद्ध अपराधों के प्रतिमध्यप्रदेश पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीतिके अनुरूप अशोकनगर जिले के एक जघन्य सामूहिक लैंगिक अपराध प्रकरण में त्वरित विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन तथा प्रभावी अभियोजन के परिणामस्वरूप माननीय न्यायालय द्वारा तीन दोषियों कोआजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन तक)एवं प्रत्‍येक को 20 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया गया है। साथ ही पीड़िता कोराष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की विक्टिम कम्पनसेशन स्कीम, 2018 के प्रावधानों के अनुसार 5 लाख रूपए प्रतिकरप्रदान किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणाने इस निर्णय को मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील, त्वरित एवं पीड़ित-केंद्रित कार्यप्रणाली का परिणाम बताते हुए कहा कि महिलाओं, बालिकाओं एवं दिव्यांगजनों के विरुद्ध अपराध करने वालों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रदेश पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने उत्कृष्ट विवेचना एवं प्रभावी अभियोजन से जुड़े पुलिस अधिकारियों एवं अभियोजन अधिकारियों की सराहना की।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में अशोकनगर जिले में दर्ज इस प्रकरण में एक 10 वर्षीय मूक-बधिर दिव्यांग बालिकाके साथ सामूहिक लैंगिक अपराध किए जाने की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस द्वारा तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर पीड़िता को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई तथा विशेष संवेदनशीलता के साथ समस्त वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया। पीड़िता के मूक-बधिर होने के कारण उसके कथन विधि अनुसारसांकेतिक भाषा विशेषज्ञ (Sign Language Interpreter) की सहायता से दर्ज कराए गए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में उसके अधिकारों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अशोकनगर राजीव कुमार मिश्राके निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने घटना के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तारकिया। विवेचना के दौरान डीएनए सहित अन्य वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य संकलित किए गए तथा पीड़िता की आयु एवं दिव्यांगता से संबंधित आवश्यक दस्तावेज एवं चिकित्सकीय साक्ष्य विधिसम्मत रूप से संलग्न किए गए।मात्र 30 दिवस में विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।

विवेचना के दौरान पुलिस एवं अभियोजन के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए सभी साक्षियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूपलगभग 8 माह के भीतरमाननीय न्यायालय द्वारा तीनों आरोपियों को दोषसिद्ध घोषित करते हुएशेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावासएवं प्रत्येक पर अर्थदंड अधिरोपित किया गया।

माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय में NALSA Victim Compensation Scheme, 2018 के प्रावधानों तथा प्रासंगिक न्यायिक दृष्टांतों का उल्लेख करते हुए पीड़िता को 5 लाख रुपयेप्रतिकर प्रदान किए जाने का भी निर्देश दिया है, जिससे उसके पुनर्वास एवं संरक्षण में सहायता मिल सके।

मध्यप्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं, बालिकाओं एवं दिव्यांगजनों के विरुद्ध अपराधों के प्रत्येक प्रकरण मेंत्वरित कार्रवाई, वैज्ञानिक विवेचना, संवेदनशील व्यवहार एवं प्रभावी अभियोजनके माध्यम से दोषियों को शीघ्र एवं कठोर दंड दिलाना तथा पीड़ितों को न्याय उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 

Aditya
Author: Aditya

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