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नए मोटर व्हीकल नियम सख्त: चालान नहीं भरा तो DL और RC पर लग सकता है ‘नो ट्रांजैक्शन’ लॉक

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जयपुर
परिवहन विभाग की चालानी कार्रवाई को न्यायालय में चुनौती देने वाले वाहन स्वामियों के लिए केंद्रीय मोटर व्हीकल एक्ट का नया संशोधन बड़ी मुसीबत बन गया है। अब आरटीओ या पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ अदालत की शरण लेने से पहले वाहन चालक को चालान राशि का 50 फीसदी हिस्सा अनिवार्य रूप से जमा कराना होगा। यदि यह राशि जमा नहीं की जाती है, तो न्यायालय आवेदक की याचिका या वाद को स्वीकार नहीं करेगा। सरकार के इस कड़े रुख के कारण 20 जनवरी 2026 को राजपत्र प्रकाशित होने के बाद से जिले में अब तक एक भी नया मामला अदालत के चौखट तक नहीं पहुंचा है।

चित्तौड़गढ़ आरटीओ कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 20 जनवरी 2026 से पहले न्यायालय में 20 प्रकरण विचाराधीन हैं। वहीं, 1 अप्रेल 2025 से 19 जनवरी 2026 के बीच 185 वाहनों पर चालानी कार्रवाई की गई, जिससे विभाग को 4.57 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके विपरीत, 20 जनवरी से 6 जुलाई 2026 के बीच महज 15 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई हुई, लेकिन इनमें से एक भी वाहन स्वामी ने कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया। वाहन चालकों ने आधी रकम कोर्ट में फंसाने और कानूनी पेचीदगियों से जूझने के बजाय पूरी राशि जमा कर मामले से छुटकारा पाना ही मुनासिब समझा।

क्या हुआ है बदलाव, समझें नया नियम
भारत सरकार द्वारा जारी नए राजपत्र के अनुसार, यातायात नियमों के उल्लंघन पर जारी चालानों के विवाद निपटारे की व्यवस्था को बेहद सख्त बना दिया गया है। यदि किसी वाहन चालक ने प्राधिकारी के समक्ष चालान को चुनौती दी है और अगले 30 दिनों के भीतर उसका निपटारा या समाधान नहीं हो पाता है, तो वह चालान प्रभावी रहेगा और संबंधित व्यक्ति को राशि भुगतनी होगी। हालांकि, यदि प्राधिकारी दस्तावेजों की जांच के बाद चालान निरस्त करता है, तो उसे तत्काल ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

सुनवाई और अपील के कड़े प्रावधान
यदि सक्षम प्राधिकारी वाहन चालक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को लिखित कारणों के साथ खारिज कर देता है, तो आदेश मिलने या पोर्टल पर अपलोड होने के 30 दिनों के भीतर चालान का भुगतान करना होगा। वाहन चालक के पास चालान राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा जमा कराकर अदालत में आवेदन दायर करने का विकल्प रहेगा। यदि 30 दिनों के भीतर न तो भुगतान किया जाता है और न ही कोर्ट में चुनौती दी जाती है, तो चालान स्वतः स्वीकार माना जाएगा। इसके बाद अगले 15 दिनों में इसका इलेक्ट्रॉनिक या वास्तविक भुगतान करना ही होगा।

लापरवाही पर लगेगा 'नो ट्रांजैक्शन' लॉक
निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी चालान न भरने वालों को प्रतिदिन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नोटिस भेजा जाएगा। सबसे सख्त कदम के तहत, चालान का निपटारा होने तक उल्लंघनकर्ता के ड्राइविंग लाइसेंस (DL) या वाहन के रजिस्ट्रेशन (RC) से जुड़ा कोई भी काम परिवहन विभाग द्वारा प्रोसेस नहीं किया जाएगा। पोर्टल पर संबंधित वाहन को ‘संव्यवहार न किया जाए’ (No Transaction) श्रेणी में ब्लॉक कर दिया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर पुलिस या अधिकृत अधिकारी को वाहन जब्त करने का भी पूरा अधिकार होगा।

 

Aditya
Author: Aditya

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