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PM2.5 प्रदूषण से सिर्फ सांस नहीं, बाल भी खतरे में, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

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अक्सर माना जाता है कि हवा प्रदूषण के कारण खांसने, दम घुटने और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने अब एक ऐसी चेतावनी दी है जो आपकी चिंताएं बढ़ा सकती है. हालिया रिसर्च में पाया गया है कि हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बारीक कण न सिर्फ हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि इनका सीधा असर हमारे बालों और स्कैल्प पर भी पड़ रहा है. ये महीन कण इतने छोटे होते हैं कि ये आसानी से स्कैल्प की त्वचा के रोमछिद्रों में घुस जाते हैं जिससे बालों का गिरना और उनकी क्वालिटी खराब होना एक बड़ी समस्या बन गया है. इस बारे में डॉक्टर ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है जो सभी को मानना चाहिए.

ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और बालों की कमजोरी
बेंगलुरु के अपोलो हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी और रेस्पिरेटरी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. समीर बंसल का कहना है, 'PM2.5 सामान्य धूल नहीं है. इसका आकार इतना छोटा होता है कि यह नाक और ऊपरी एयरवे के सुरक्षा कवच को पार करके फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच जाता है. उन्होंने बताया कि प्रदूषण को केवल खांसी या सांस की तकलीफ तक सीमित नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसका 'इन्फ्लेमेटरी बोझ' शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है जिससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इन्फ्लेमेटरी रिस्पॉन्स पैदा होते हैं.'

बेंगलुरु के फोर्टिस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डायरेक्टर डॉ. विवेक आनंद पडेगल का कहना है, 'लोग PM2.5 को फेफड़ों के लिए हानिकारक मानते हैं लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि इसका प्रभाव हेयर फॉलिकल्स यानी बालों की जड़ों पर भी पड़ रहा है. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से स्कैल्प में इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है जो बालों के झड़ने, उनके पतले होने और स्कैल्प के अस्वस्थ होने का कारण बन सकता है.'

स्कैल्प का इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण के सूक्ष्म कण शरीर में फ्री रेडिकल्स को बढ़ाते हैं, जो बालों की जड़ों की प्रोटीन संरचना को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे बाल न केवल कमजोर और रूखे हो जाते हैं, बल्कि उनके टूटने की रफ्तार भी बढ़ जाती है.

द मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण की मार सिर्फ बालों की लंबाई तक सीमित नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक तत्व स्कैल्प में सूजन या इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं. जब स्कैल्प पर गंदगी और टॉक्सिन्स की परत जमती है तो यह बालों के रोमछिद्रों को प्रभावित करती है जिससे बालों को जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इसका नतीजा ये होता है कि बाल समय से पहले पतले होने लगते हैं और स्कैल्प में खुजली व डैंड्रफ की समस्या आम हो जाती है.

सिस्टमिक हेल्थ रिस्क
डॉ. बंसल और डॉ. पडेगल इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि वायु प्रदूषण अब केवल एक अंग की समस्या न होकर एक 'सिस्टमिक हेल्थ रिस्क' बन गया है जो बालों सहित पूरे शरीर को प्रभावित कर रहा है. प्रदूषण की वजह से स्कैल्प पर जो गंदगी की परत जमती है वह स्कैल्प को सेंसिटिव बनाती है. यदि इसे समय रहते साफ न किया जाए तो यह बालों के पतले होने और बालों की जड़ों की मजबूती कम होने का कारण बनती है.

बचाव के लिए क्या करें?
इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर निकलते समय बालों को स्कार्फ या कैप से जरूर ढकें. प्रदूषण वाली जगहों पर जाने के बाद बालों को माइल्ड सल्फेट-फ्री शैम्पू से धोना चाहिए ताकि गंदगी जमा न हो. इसके अलावा, एंटीऑक्सीडेंट युक्त हेयर केयर प्रोडक्ट्स और संतुलित डाइट का सेवन बालों की जड़ों को प्रदूषण के असर से बचाने में मददगार साबित हो सकता है.

Aditya
Author: Aditya

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