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रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में बड़ा कदम, दुर्ग में वारिसों ने खुद सौंपा मकान

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दुर्ग.

सरकारी भूमि पर वर्षों से बने कब्जों को हटाने के लिए अक्सर प्रशासन और संबंधित विभागों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे मामलों में स्वेच्छा से कब्जा छोड़ने की घटनाएं विरले ही देखने को मिलती हैं। ऐसे समय दल्लीराजहरा मूल निवासी एवं वर्तमान में चंदखुरी निवासी एक परिवार ने ईमानदारी, नैतिकता और कानून के प्रति सम्मान का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी क्षेत्र में सराहना हो रही है।

दल्लीराजहरा के वार्ड क्रमांक 26 स्थित न्यू बस स्टैंड के समीप चंदैनी भाठा क्षेत्र में रेलवे बोर्ड की अधिग्रहित भूमि पर लगभग 50 वर्षों से निर्मित एक मकान को उसके वारिसों ने स्वेच्छा से रेलवे प्रशासन को वापस सौंपने का निर्णय लिया है। परिवार के मुखिया स्वर्गीय बलदेव प्रसाद यादव के निधन के बाद उनके पुत्र गोपाल कुमार यादव ने परिवार की सहमति से रेलवे प्रशासन को आवेदन प्रस्तुत कर उक्त संपत्ति को रेलवे की मूल संपत्ति के रूप में पुनः अपने अधिपत्य में लेने का अनुरोध किया है।

वर्तमान में दुर्ग जनपद पंचायत के सभापति गोपाल कुमार यादव ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि संबंधित भूमि रेलवे बोर्ड की स्थायी संपत्ति है तथा उस पर निर्मित मकान का कोई शासकीय पट्टा, स्वामित्व दस्तावेज अथवा वसीयत उपलब्ध नहीं है। इसलिए परिवार ने नैतिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए मकान की चाबी रेलवे प्रशासन को सौंपने तथा भविष्य में किसी प्रकार का स्वामित्व दावा नहीं करने का निर्णय लिया है।

गोपाल यादव ने बताया कि उनके पिता बलदेव प्रसाद यादव का 13 जनवरी 2026 को निधन हो गया था। उनके निधन के पश्चात वैधानिक वारिस के रूप में उनकी माता द्रौपती बाई यादव, स्वयं गोपाल यादव, छोटे भाई गोविन्दा यादव तथा बहन सती यदु ने आपसी सहमति से उक्त मकान को बंद कर दिया है, और वर्तमान में सभी परिवारजन दुर्ग जिले के चंदखुरी क्षेत्र में निवासरत हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इस संबंध में उन्होंने सीनियर डीएम साहब, डीआरएम आफिस रायपुर को स्वेच्छा से कब्जा छोड़ने संबंधी आवेदन सौंपा तो उनका कहना था पहली बार कोई ऐसा कर रहा है।

Aditya
Author: Aditya

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