60 दिन तक जंगल में दबी रही बाघ की मौत, जिम्मेदार अफसरों को नहीं लगी भनक!

क्या छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही से बचने की हो रही कोशिश?
सतना। सरभंगा जंगल में बाघ की मौत का मामला अब केवल वन्यजीव संरक्षण का नहीं, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिस विभाग की पहली जिम्मेदारी जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा है, वह यदि करीब 60 दिन तक यह भी नहीं जान पाया कि उसके क्षेत्र का एक बाघ मर चुका है….
अब जब मामला खुल गया है तो पूरी ताकत इस बात पर लगाई जा रही है कि नाखून और दांत मिलने की कहानी सुर्खियां बन जाए, ताकि असली सवाल पीछे छूट जाएं!
अगर सचमुच नाखून और दांत बरामद हुए हैं तो वन विभाग यह क्यों नहीं बता रहा कि वे कहां मिले, किसके पास से मिले और किस पंचनामा के तहत जब्त किए गए? बरामदगी जितनी रहस्यमयी बनाई जा रही है, उससे ज्यादा रहस्य विभाग की चुप्पी बन चुकी है!

बाघ नहीं मिला, लेकिन अफसर ‘व्यस्त’ रहे….
सरभंगा कोई साधारण जंगल नहीं, बल्कि बाघों की सक्रिय मौजूदगी वाला संवेदनशील वन क्षेत्र है। ऐसे इलाके में यदि एक बाघ की मौत हो जाए, उसका शव दफना दिया जाए और करीब 60 दिन तक जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक न लगे, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।
सवाल उस अनुभाग अधिकारी से भी है, जो हर बैठक और हर गतिविधि में खुद को सबसे सक्रिय साबित करने में पीछे नहीं रहते। आखिर ऐसा कौन-सा ‘महत्वपूर्ण टास्क’ था कि जंगल में बाघ गायब हो गया और उन्हें खबर तक नहीं लगी?
कार्रवाई वहीं, जहां प्रतिरोध सबसे कम….
पहले चौकीदार गिरफ्तार हुआ, फिर बीट गार्ड निलंबित कर दिया गया। यानी कार्रवाई वहीं तक पहुंची जहां जवाब देना सबसे आसान है। लेकिन जिन अधिकारियों के जिम्मे निगरानी, गश्त और जवाबदेही थी, उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
अगर एक बीट गार्ड के भरोसे पूरा जंगल चल रहा था, तो फिर रेंजर, अनुभाग अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका क्या थी? केवल अधीनस्थों पर कार्रवाई कर क्या विभाग अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगा?
असल जांच अभी बाकी है…..
यह मामला केवल बाघ के शिकार का नहीं, बल्कि वन विभाग की जवाबदेही का भी है। असली सवाल नाखून मिलने का नहीं, बल्कि यह है कि बाघ मरने के बाद 60 दिन तक विभाग आखिर कर क्या रहा था? जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिलता, तब तक हर बरामदगी का दावा और हर निलंबन अधूरा ही माना जाएगा………









