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करंट के तार में फंसकर बाघ की मौत, जंगल में दफनाया शव; वन विभाग की कार्रवाई के बीच निगरानी व्यवस्था पर सवाल !………

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मुखबिर की सूचना पर खुला मामला, डीएफओ के नेतृत्व में शुरू हुई खुदाई; घटना के बाद वन अमले की सतर्कता और सूचना तंत्र पर उठे गंभीर प्रश्न……!

सतना। मझगवां वन परिक्षेत्र में करंट प्रवाहित तार की चपेट में आने से एक बाघ की मौत और उसके शव को जंगल में दफनाने का मामला सामने आने से वन महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन विभाग ने कार्रवाई शुरू की और आरोपियों की निशानदेही पर जंगल में खुदाई कर बाघ के अवशेष तलाशने का अभियान शुरू किया।

बताया जा रहा है कि घटना कई दिन पुरानी है। सूचना मिलने के बाद डॉग स्क्वॉड, उड़नदस्ता दल और वन विभाग की टीम ने जंगल में सर्चिंग अभियान चलाया, लेकिन लगातार बारिश और घनी झाड़ियों के कारण सफलता नहीं मिल सकी, बाद में पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर शव को दफनाए जाने का स्थान चिन्हित किया गया, जहां डीएफओ मयंक चांदीवाल के नेतृत्व में खुदाई शुरू कराई गई।

मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बाघ की मौत कई दिन पहले हुई और शव को जंगल में दफना दिया गया, तो नियमित गश्त, बीट व्यवस्था और स्थानीय सूचना तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? आखिर ऐसी गंभीर घटना का खुलासा विभाग को अपने नेटवर्क से नहीं, बल्कि मुखबिर की सूचना से क्यों हुआ? वन परिक्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी प्रणाली की भी निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक मानी जा रही है।

अब वन विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में किस-किस की भूमिका रही और इतनी बड़ी घटना आखिर विभाग की नजरों से कैसे ओझल रही। प्रशासनिक स्तर पर भी लोग इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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