Edition

सतना RTO कार्यालय में घूसखोरी का खेल? ‘मार्किंग सिस्टम’ पर गंभीर सवाल! जनता के बाद अब एजेंट भी परेशान…….

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

फाइलों पर मार्किंग का खेल…..! 

बिना कथित भुगतान अटक रहे काम, पहले ऑफिस के बाहर मार्किंग, फिर फाइल आगे; अब आम लोगों से लेकर एजेंटों तक में नाराजगी….

सतना RTO में घूसखोरी चरम पर! हर फाइल पर ‘मार्किंग’ का खेल, बिना कथित भुगतान अटक रहे काम….. पहले ऑफिस के बाहर मार्किंग, फिर फाइल आगे; आम लोगों से लेकर एजेंटों तक में नाराजगी……

बाहरी लोगों के कथित दखल से बढ़ी चिंता…

कार्यालय के बाहर से चला रहा फाइलों का कथित ‘गेट सिस्टम’?

सूत्रों का दावा- लाइसेंस, ट्रांसफर और परमिट की फाइलों में पहले कार्यालय के बाहर से कथित ‘मार्किंग’, फिर सरकारी प्रक्रिया; पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की उठी मांग…….

सतना क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) एक बार फिर कथित घूसखोरी और बाहरी व्यक्तियों की भूमिका को लेकर चर्चा में है। हैरानी की बात यह है कि जहां आमतौर पर लोग दलालों से परेशान होने की बात करते हैं, वहीं इस मामले में कुछ एजेंटों का दावा है कि वे स्वयं कार्यालय के बाहर सक्रिय दो कथित व्यक्तियों दीपू और लल्ली की कथित व्यवस्था से परेशान हैं।

विभागीय सूत्रों का दावा है कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया है। आरोप है कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन ट्रांसफर, परमिट सहित कई फाइलें पहले इन दोनों व्यक्तियों के पास पहुंचती हैं। वहां कथित रूप से फाइलों की “मार्किंग” या अनुमोदन के बाद ही उन्हें कार्यालय के भीतर अधिकारियों के पास भेजा जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कुछ एजेंटों का यह भी कहना है कि उन्हें अपना काम समय पर करवाना होता है, इसलिए वे शिकायत करने से बचते हैं। उनका कहना है कि यदि वे विरोध करें या उच्च अधिकारियों से शिकायत करें तो उनके काम में देरी हो सकती है या अन्य प्रकार की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इस कारण अधिकांश लोग चुप रहकर कथित व्यवस्था का पालन करने को मजबूर हो जाते हैं।

विभागीय सूत्रों का यह भी दावा है कि यदि कार्यालय की पुरानी और वर्तमान फाइलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा कंप्यूटर रिकॉर्ड और फाइलों पर किए गए हस्ताक्षरों का मिलान कराया जाए, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति कौन हैं। यदि किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, तो यह गंभीर जांच का विषय हो सकता है। इसी तरह यह भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि कोई गैर-सरकारी व्यक्ति नियमित रूप से अधिकारी के कक्ष में बैठकर फाइलों की प्रक्रिया से जुड़ा रहता है, तो उसे इसकी अनुमति किस आधार पर दी गई।

मामले मे संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि आरोपों मे सच्चाई है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि आम नागरिकों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सके…..

 

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!