सतना। सतना क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) एक बार फिर कथित घूसखोरी और दलाल तंत्र को लेकर चर्चा में है। विभागीय सूत्रों और एजेंटों के हवाले से आरोप लगाए जा रहे हैं कि कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन ट्रांसफर, परमिट सहित कई कार्य बिना कथित “मार्किंग” और अवैध भुगतान के आगे नहीं बढ़ते।
विभागीय सूत्रों का दावा है कि पहले ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लगभग 600 रुपये की कथित अवैध वसूली की चर्चा थी, जबकि अब नई प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बाद 1 जुलाई से इसे बढ़ाकर 1000 रुपये किए जाने की तैयारी की बात कही जा रही है। वहीं वाहन ट्रांसफर के मामलों में छोटी गाड़ियों से लगभग 2000 रुपये और बड़ी गाड़ियों में 10 हजार रुपये तक की कथित वसूली होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
बिना ऐसी मार्किंग कोई फ़ाइल नहीं जाती RTO कार्यालय, आखिर किसके हैं यह सिग्नेचर…?

सूत्रों के अनुसार कार्यालय में दीपू और लल्ली नामक व्यक्तियों द्वारा एजेंटों से फाइल लेकर उन पर कथित रूप से “मार्किंग” की जाती है, जिसके बाद ही फाइल आगे बढ़ती है। यह भी आरोप है कि यदि फाइल किसी प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति या वरिष्ठ अधिकारी से जुड़ी होती है तो उसे सीधे वरिष्ठ अधिकारी तक भेज दिया जाता है, जबकि सामान्य नागरिकों और एजेंटों की फाइलों को पहले इसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लेकिन लगातार लग रहे ऐसे आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शिकायतें सही हैं तो जिम्मेदार अधिकारी जांच कर पारदर्शी व्यवस्था कब सुनिश्चित करेंगे?
दशकों पुरानी फाइलें खुलें तो कई राज आ सकते हैं सामने…. सूत्रों का दावा है कि यदि RTO कार्यालय की वर्षों पुरानी फाइलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अधिकांश फाइलों पर कार्यालय के बाहर सक्रिय इन्ही दोनों व्यक्तियों की कथित मार्किंग या हस्ताक्षर मिलेंगे…
आरोप है की अधिकांश फाइलें पहले इन्हीं के स्तर पर देखी जाती हैं और उसके बाद ही कार्यालय की प्रक्रिया आगे बढ़ती है,
ऐसे में सवाल है कि पारदर्शी व्यवस्था आखिर कब लागू होगी और जनता को इस कथित दलाल तंत्र से राहत कब मिलेगी?
नागरिकों एवं एजेंटों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, अन्यथा इसकी शिकायत संभाग से लेकर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों तक की जाएगी……









