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सिर्फ 60 रुपये में पैंक्रियाज कैंसर की जांच करेगा ‘यूरोस्मार्ट’ उपकरण

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अंबाला
बब्याल के रहने वाले एवं आइआइटी दिल्ली के छात्र शिवम ने शोध कर पैंक्रियाज कैंसर की बीमारी की जांच के लिए उपकरण यूरोस्मार्ट बनाया है। शिवम का दावा है कि इससे यूरिन (पेशाब) के सैंपल से शरीर में पैंक्रियाज कैंसर का पता चल जाएगा।

कुछ लोगों पर इसका टेस्ट भी किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शिवम ने इस उपकरण के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। इससे सिर्फ 60 रुपये में जांच हो सकेगी।

उम्मीद है कि जल्द ही यह बाजार में उपलब्ध होगा, जिसके लिए एक प्रक्रिया से गुजरना होगा। वर्ष 2024 में शिवम कुमार बग्गन, कुशाग्र जैन, खालिद भट्ट और प्रो. नवीन की टीम ने शोध शुरू किया था। यह एक साइंस जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है।

ऐसे काम करता उपकरण
शिवम ने बताया कि यूरोस्मार्ट उपकरण सेंसर पर काम करता है। इस में पोटेंशियो स्टेट सेंसर लगाया है, जो मोबाइल से जुड़ा होता है। मरीज का यूरिन सैंपल इस उपकरण में लिया जाता है। इस पर एक बटन लगाया गया है, जिसे दबाना होता और यूरिन की एक बूंद सेंसर पर पहुंच जाती है।

इसके बाद सारा काम सेंसर करता है। करीब 15 मिनट का समय लगता है और रिपोर्ट मोबाइल पर आ जाती है और स्पष्ट हो जाता है कि मरीज को पैंक्रियाज कैंसर है या नहीं। यह जांच ब्लड से होती है, जिसमें काफी समय लगता है।

जिसे पैंक्रियाज कैंसर होगा, उसका शरीर बायोमार्कर सीए 19.9 रिलीज करता है। यह ब्लड और यूरिन दोनों में पाया जाता है। अभी इसका ट्रायल प्रथम चरण में है। उम्मीद है कि जल्द ही यह उपकरण बाजार में उपलब्ध होगा

यह है पैंक्रियाज कैंसर
पैंक्रियाज कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो पैंक्रियाज में कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। यह पाचन एंजाइम और इंसुलिन बनाने वाली ग्रंथि को प्रभावित करता है। शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होता और देरी से पता चलने के कारण यह और घातक हो जाता है। यही कारण है कि इस तरह का कैंसर काफी घातक हो जाता है, जबकि उपचार काफी महंगा है।

आइआइटी दिल्ली के प्रो. एवं शोध टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि सुबह का पहला यूरिन जांच के लिए बेहतर होता है, क्योंकि इसमें इन्फार्मेशन अधिक होती है। इस टेस्ट में यदि रीडिंग 37 यूनिट प्रति एमएल से नीचे आती है तो पैंक्रियाज कैंसर नहीं मान सकते, जबकि इससे अधिक यह जितना अधिक जाएगा उतना कैंसर माना जाता है। अब इस उपकरण को लेकर एम्स में जा रहे हैं, जहां आगामी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

उपचार की निगरानी में इस्तेमाल हो सकता: डॉ. यशपाल
कैंसर विशेषज्ञ एवं अटल कैंसर केयर सेंटर के निदेशक डा. यशपाल वर्मा का कहना है कि सीए 19-9 एक गैर-विशिष्ट परीक्षण है, इसलिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इसे एक स्वतंत्र नैदानिक उपकरण के रूप में उपयोग करने के बजाय, उपचार की निगरानी और पुनरावृत्ति का पता लगाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। पित्त की पथरी और अग्नाशयशोथ जैसी सामान्य स्थितियों में भी इसका स्तर अधिक हो सकता है।

 

Aditya
Author: Aditya

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