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ईंधन संकट से बड़ी राहत! भारत ने अगस्त तक का LPG और कच्चे तेल का इंतजाम कर लिया

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नई दिल्ली
 मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर ईंधन की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. लेकिन इस संकट के बावजूद भारत में रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होने वाली है. इसका कारण यह है कि भारतीय रिफाइनरियों ने बेहद सूझबूझ के साथ देश में कम-से-कम अगस्त 2026 तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) का इंतजाम कर लिया है। 

उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने हाल के हफ्तों में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) और अन्य वैश्विक विक्रेताओं से कच्चे तेल और एलपीजी की रिकॉर्ड खरीद की है. इस वजह से अगस्त तक की घरेलू जरूरतों को पूरा करने करने की व्‍यवस्‍था हो गई है। 

ऐसे आ रहा है तेल
सप्लाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए भारतीय रिफाइनरियां भारतीय कंपनियां फ्री-ऑन-बोर्ड (FOB) आधार पर समंदर के बीचों-बीच ही एक जहाज से दूसरे जहाज में क्रूड और एलपीजी ट्रांसफर करके खेप उठा रही हैं.इसे शिप-टू-शिप (Ship-to-Ship) ट्रांसफरकहते हैं. इसके लिए एडीएनओसी अपने फुजैराह स्टोरेज, जिर्कू और दास द्वीप (Das Island) से कच्चे तेल की खेप भारतीय रिफाइनरियों को उपलब्‍ध करा रहा है. इसके अलावा मलेशिया और ओमान के सोहार क्षेत्र में भी यह री-लोडिंग सुविधा दी जा रही है. भारत के लिए एलपीजी की मुख्य लोडिंग सोहार से की जा रही है। 

भारतीय रिफाइनरी के एक अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि भारत के पास अब एलपीजी का कम-से-कम जुलाई के मध्य तक का पर्याप्त स्टॉक है और कच्चे तेल को लेकर भी अगस्त तक कोई समस्या नहीं होगी। 

HPCL ने खरीदा 40 लाख बैरल मुरबान क्रूड
सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पो
रेशन लिमिटेड (HPCL) धड़ाधड़ तेल खरीद रही है. व्यापारिक सूत्रों के ने बताया कि एचपीसीएल ने अगस्त डिलीवरी के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 40 लाख बैरल मुरबान (Murban) क्रूड की बड़ी खेप खरीदी है. यह सौदा टोटलएनर्जीज की ट्रेडिंग शाखा टोट्सा और ‘मर्कुरिया’ के जरिए जुलाई के डेटेड ब्रेंट बेंचमार्क से करीब 40 सेंट प्रति बैरल प्रीमियम पर तय हुआ है. इससे ठीक एक हफ्ते पहले HPCL ने अपनी 1.80 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली राजस्थान रिफाइनरी के लिए ब्राजील और पश्चिम अफ्रीका से भी 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। 

लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से आ रहा तेल
केवल एचपीसीएल ही नहीं, बल्कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और मैंगलोर रिफाइनरी (MRPL) जैसी अन्य दिग्गज भारतीय कंपनियों ने भी स्पॉट टेंडर के जरिए ताबड़तोड़ खरीदारी की है. मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ने के बाद भारत ने समय रहते अपनी रणनीति बदलते हुए पारंपरिक खाड़ी देशों से निर्भरता घटाकर लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से तेल का आयात बढ़ा दिया था. सऊदी अरब से भी भारत को लगातार बैकअप सपोर्ट मिलता रहा। 

Aditya
Author: Aditya

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