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पीएम किसान योजना: बिहार में किसानों को मिली राहत, 34 हजार नाम लिस्ट से बाहर

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पटना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत बिहार के लाखों किसानों का लंबा इंतजार अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। सरकार की ओर से शनिवार को राज्य के लगभग 73 लाख किसानों के बैंक खातों में योजना की राशि सफलतापूर्वक ट्रांसफर कर दी गई है। प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने बिहार के इन लाभार्थी किसानों के लिए कुल 1,463 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की है, जो सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों के खातों में क्रेडिट हो चुकी है। खेती-किसानी के इस चालू सीजन में बैंक खातों में पैसा आने से बिहार के ग्रामीण इलाकों के किसानों को एक बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिली है।

किसानों के खाते में पहुंचे दो-दो हजार रुपये
इस योजना के नियमों के तहत सभी पात्र और लाभुक किसानों के खातों में दो-दो हजार रुपये की सम्मान राशि भेजी गई है। मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस बेहद लोकप्रिय योजना के तहत प्रत्येक वर्ष देश भर के किसानों को हर चार-चार माह के अंतराल पर दो-दो हजार रुपये की तीन बराबर किस्तें सीधे उनके खातों में भेजी जाती हैं। बिहार के किसानों के खातों में आज जो रकम क्रेडिट हुई है, वह इस योजना के तहत मिलने वाली 23वीं किस्त की राशि है। मोबाइल पर मैसेज आते ही बिहार के किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है और वे अपनी अगली फसलों की खाद व बीज की व्यवस्था के लिए बैंकों व सीएसपी केंद्रों का रुख करने लगे हैं।

22वीं किस्त के मुकाबले इस बार 34 हजार किसानों को लगा बड़ा झटका
जहाँ एक तरफ 73 लाख किसानों के घरों में इस राशि के आने से उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के हजारों किसानों को इस बार मायूसी का सामना भी करना पड़ा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिछली यानी 22वीं किस्त की तुलना में बिहार के लगभग 34 हजार किसानों को इस बार योजना की राशि नहीं मिल सकी है। गौरतलब है कि 22वीं किस्त के समय बिहार के कुल 73 लाख 34 हजार किसानों के खातों में 1,467 करोड़ रुपये की राशि भेजी गई थी। लेकिन इस बार भू-सत्यापन और ई-केवाईसी जैसी जरूरी तकनीकी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा नहीं करने के कारण राज्य के 34 हजार किसानों के नाम लाभार्थी सूची से बाहर हो गए हैं। कृषि विभाग ने इन वंचित किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपनी त्रुटियों को सुधारें ताकि अगली किस्त में उन्हें इस समस्या का सामना न करना पड़े।

Aditya
Author: Aditya

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