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मुख्यमंत्री साय के निर्णय से तुएगोंदी में खुशी की लहर, पारंपरिक अनुष्ठान के साथ मनाया गया उत्सव

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रायपुर

बालोद जिले में स्थित जामड़ी पाट में आज का दिन आदिवासी समाज के लिए बेहद ऐतिहासिक और हर्षोल्लास से भरा रहा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की त्वरित और संवेदनशील पहल के परिणामस्वरूप, आदिवासी समाज की यहाँ पारंपरिक अनुष्ठान करने की माँग आखिरकार पूरी हो गई है। इस सुखद निर्णय के बाद, आज समाज के लोगों ने अपनी गौरवशाली परंपरा जामड़ी पाट में पूजा और रीति-रिवाजों के अनुरूप जलकैना में भव्य अनुष्ठान संपन्न किया।
      
विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आदिवासी समाज के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में समाज के प्रतिनिधियों ने जामड़ी पाट में पारम्परिक देवता की अर्चना तथा वहाॅ स्थित जलकैना में अपनी पारंपरिक अनुष्ठान की अनुमति को लेकर लंबे समय से चली आ रही माँग रखी थी। समाज की भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए, मुख्यमंत्री ने अविलंब जिला प्रशासन बालोद को आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय के आदेशों का पालन करते हुए बालोद जिला प्रशासन की देखरेख में आज जामड़ी पाट में अनुष्ठान का कार्य शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

जलकैना (कुंड) में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार देव-आराधना की। इस दौरान समाज के लोगों में सकारात्मक उत्साह का भाव देखा गया, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस पहल की आदिवासी समाज ने सराहना भी की है। यह निर्णय केवल एक अनुष्ठान की अनुमति तक सीमित नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की मूल सांस्कृतिक धरोहरों, परंपराओं और उनकी धार्मिक आस्थाओं के संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  

 

Aditya
Author: Aditya

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