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संजीव अरोड़ा को नहीं मिली राहत, अदालत बोली- जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का खतरा

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चंडीगढ़ 
. पंजाब सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका लगा है. ट्रायल कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत देने से गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है और साक्ष्‍य भी प्रभावति हो सकते हैं. इसलिए जमानत याचिका खारिज कर दी गयी है। 

कोर्ट ने अपने आदेश में विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी मामले से जुड़े एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, संजीव अरोड़ा ने एक गवाह को उसका बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35 हजार रुपये का भुगतान किया था. अदालत ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो उसके द्वारा दोबारा गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। 

खारिज करने की बताई वजह
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. ऐसे में यदि किसी आरोपी के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास के आरोप सामने आते हैं, तो उसे जमानत देने से जांच और सुनवाई प्रभावित हो सकती है. इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि संजीव अरोड़ा नियमित जमानत पाने के हकदार नहीं हैं और उनकी याचिका खारिज कर दी। 

पहले भी गवाह प्रभावित कर चुका है
कोर्ट ने आदेश के अंत में विशेष रूप से उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, आरोपी ने गवाह को अपना बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35,000 रुपये का भुगतान किया था। 

क्‍या है मामला
संजीव अरोड़ा पंजाब की राजनीति में एक चर्चित चेहरा हैं और वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं. उनके खिलाफ चल रहे मामले को लेकर पिछले कुछ समय से कानूनी कार्यवाही जारी है. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष यह दलील दी थी कि आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है. इसी आधार पर जमानत का विरोध किया गया था। 
अब बचा है ये विकल्‍प

अब ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद संजीव अरोड़ा को राहत नहीं मिली है. हालांकि, उनके पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प खुला हुआ है. फिलहाल अदालत के इस फैसले ने मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों में चर्चा तेज कर दी है। 

Aditya
Author: Aditya

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