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अतिथि शिक्षक संघ के चुनाव में शंभू चरण दुबे की रिकॉर्ड मतों से जीत, बने प्रदेश अध्यक्ष…..

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प्रदेश के 55 जिलों के अतिथि शिक्षकों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुना नेतृत्व; नियुक्ति, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण की मांगों को मजबूती से उठाने की उम्मीद….

भोपाल। मध्यप्रदेश अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए भोपाल स्थित बघेलखंड भवन में आयोजित चुनाव में वरिष्ठ समाजसेवी शंभू चरण दुबे ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की। प्रदेश के सभी 55 जिलों के अतिथि शिक्षकों की भागीदारी से संपन्न इस निर्वाचन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष का चयन किया गया। इस जीत को अतिथि शिक्षकों के बीच संगठनात्मक एकजुटता मजबूत करने और लंबे समय से लंबित मांगों को प्रभावी ढंग से उठाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

लोकतांत्रिक चुनाव से चुना गया प्रदेश का नेतृत्व….. मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षक लंबे समय से नियुक्ति, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण सहित विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर प्रदेश में समय-समय पर आंदोलन और संगठनात्मक गतिविधियां होती रही हैं। हालांकि, अलग-अलग संगठनों और नेतृत्व के कारण अतिथि शिक्षकों की एकजुटता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में अतिथि शिक्षकों के बीच व्यापक सहमति से प्रदेश अध्यक्ष चुनने की आवश्यकता महसूस की गई। शिक्षकों का मत रहा कि संगठन का नेतृत्व किसी सीमित बैठक या कुछ लोगों की घोषणा के बजाय प्रदेश के अतिथि शिक्षकों की भागीदारी और मतों के आधार पर तय होना चाहिए। इसी सोच के साथ भोपाल के बघेलखंड भवन में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए लोकतांत्रिक चुनाव आयोजित किया गया।

इस चुनाव में प्रदेश के 55 जिलों के अतिथि शिक्षकों की भागीदारी ने निर्वाचन को व्यापक स्वरूप दिया। चुनाव के माध्यम से शंभू चरण दुबे को मिली रिकॉर्ड मतों की जीत को उनके प्रति शिक्षकों के समर्थन और नेतृत्व से जुड़ी अपेक्षाओं के रूप में देखा जा रहा है।

नियुक्ति और नियमितीकरण की लड़ाई को एकजुट करने की उम्मीद…. प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद शंभू चरण दुबे के सामने अतिथि शिक्षकों की विभिन्न मांगों को एक साझा मंच पर लाने की अहम जिम्मेदारी होगी। अतिथि शिक्षक लंबे समय से अपने भविष्य की अनिश्चितता, नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण जैसे मुद्दों पर समाधान की मांग कर रहे हैं।

शिक्षकों को उम्मीद है कि नए नेतृत्व के माध्यम से उनकी समस्याओं को संगठित तरीके से शासन के सामने रखा जाएगा और मांगों को लेकर चल रहे प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के बीच समन्वय स्थापित करना और संगठन को मजबूत बनाना भी नए अध्यक्ष के लिए महत्वपूर्ण होगा।

निर्वाचन प्रक्रिया में इनकी रही प्रमुख भूमिका… बघेलखंड भवन में आयोजित चुनाव में निर्वाचन प्रक्रिया के संचालन के लिए पीठासीन एवं निर्वाचन अधिकारी के रूप में अशोक पांडेय, सेवानिवृत्त व्याख्याता विनोद जायसवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता बलराम यदुवंशी और सेवानिवृत्त चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.एन. पांडेय प्रमुख रूप से शामिल रहे।

अतिथि शिक्षक संघ से जुड़े आशीष शर्मा, जगन्नाथ अवस्थी, अर्जुन सिंह गुर्जर, राकेश कुशवाह, रवि वर्मा, प्रेमा प्रजापति और कीर्ति राजपूत सहित अन्य लोग भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे।

अब नेतृत्व की परीक्षा, मांगों को परिणाम तक पहुंचाने की चुनौती

शंभू चरण दुबे की रिकॉर्ड मतों से जीत के बाद अतिथि शिक्षक संघ को लेकर नई उम्मीदें जुड़ी हैं। लोकतांत्रिक तरीके से अध्यक्ष चुनने की यह पहल संगठन को अधिक प्रतिनिधिक और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि, इस समर्थन को ठोस परिणामों में बदलना नए नेतृत्व की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

अतिथि शिक्षकों को उम्मीद है कि प्रदेश अध्यक्ष उनके अधिकारों, नियुक्ति, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देंगे। अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि चुनाव से मिली एकजुटता को किस तरह प्रदेशव्यापी संगठनात्मक ताकत में बदला जाता है और अतिथि शिक्षकों की लंबित मांगों पर आगे क्या ठोस पहल होती है।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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