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पीडब्ल्यूडी की 1 लाख स्ट्रीट लाइट्स बदलेंगी, खराब लाइट 48 घंटे में ठीक करना होगा अनिवार्य

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नई दिल्ली
कहीं आपको संगीतमय रोशनी वाली स्ट्रीट लाइट्स दिखें, तो चौंकने की जरूरत नहीं। दिल्ली सरकार पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर लगी एक लाख स्ट्रीट लाइट्स को बदलकर नए किस्म की आधुनिक स्ट्रीट लाइट्स लगाने की योजना बना रही है। सरकार पहली बार मंथली इंस्टॉलमेंट मॉडल अपना रही है। इसके तहत लाइट्स लगाने वाली एजेंसी को हर महीने भुगतान किया जाएगा। कहीं कोई लाइट खराब होती है, तो उसे 48 घंटे में बदलना भी होगा।

    कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार, देश भर में किसी प्रोजेक्ट का भुगतान सरकारी एजेंसियां ओपन टेंडर, बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर), ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) या फिर हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत करती हैं।
    भुगतान की इस पुरानी प्रक्रिया को छोड़कर सरकार पहली बार ईएमआई मॉडल अपना रही है।
    इसके तहत दिल्ली की 1400 किमी लंबी सड़कों पर लगी एक लाख स्ट्रीट लाइट्स बदली जाएंगी।
    किसी एक एजेंसी को स्ट्रीट लाइट्स बदलने का ठेका दिया जाएगा और 60 किस्तों में उसका भुगतान किया जाएगा।
    जो एजेंसी स्ट्रीट लाइट लगाएगी, उसे ही पांच साल तक उनका मेंटेनेंस भी करना होगा। अगर किसी सड़क पर कोई लाइट नहीं जल रही है, तो एजेंसी को उसे 48 घंटे में बदलना होगा।
    48 घंटे में बदलनी होगी खराब लाइट, लापरवाही बरतने पर एजेंसी को रोज देना होगा 2000 रुपये जुर्माना
    60 इंस्टॉलमेंट में कुल ₹450 करोड़ का भुगतान किया जाएगा
    कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि अगर एजेंसी तय समय में लाइट नहीं बदलती है, तो उसे प्रति लाइट, प्रति दिन 2000 रुपये का जुर्माना भी देना होगा।
    मंत्री का कहना है कि दिल्ली में पहली बार आधुनिक संगीतमय स्ट्रीट लाइट्स लगाने की योजना है, जिन्हें किसी खास अवसर पर सेलिब्रेशन के लिए संगीतमय तरीके से जलाया और बुझाया जा सकेगा।

रात ढलने के साथ खुद कम होगी रोशनी
प्रवेश का कहना है कि लाइट्स की रोशनी 40 लक्स होगी। वर्तमान में जो लाइट्स लगी हैं, उनकी रोशनी 10 से 15 लक्स है। वे इतनी अधिक ऊंचाई पर लगी हैं कि उनसे सड़कों पर पर्याप्त रोशनी नहीं हो पाती। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट्स की एक और विशेषता होगी कि जैसे-जैसे रात ढलेगी और उजाला बढ़ेगा, उसी के अनुसार लाइटों की रोशनी भी कम होती जाएगी। यानी थोड़ा उजाला होने पर रोशनी 40 लक्स से 30, फिर 20 और 15 लक्स तक हो जाएगी और सुबह होने पर लाइट्स बंद हो जाएंगी। स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट की लागत 450 करोड़ रुपये है। आधुनिक लाइटों से पांच साल में करीब 300 करोड़ रुपये की बिजली बचत होगी। सरकार जितने पैसे प्राइवेट एजेंसियों को लाइट्स के लिए देगी, उसका बड़ा हिस्सा बचत के जरिए वसूल भी हो जाएगा। लाइटों की मॉनिटरिंग के लिए कंपनी को कंट्रोल रूम भी स्थापित करना होगा।
सुदामा यादव

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Author: Editor

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