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पंजाब का अजब विरोधाभास: विदेश पलायन के बीच वोटरों की संख्या में 45 लाख का इजाफा

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चंडीगढ़ 

 पंजाब में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। राज्य के गांवों और शहरों से युवा बेहतर शिक्षा और रोजगार के लिए विदेश जा रहे हैं। इसके बावजूद पंजाब की मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। यह स्थिति राज्य के बदलते सामाजिक ढांचे पर सवाल उठाती है।

2009 से 2024 के बीच पंजाब में मतदाताओं की संख्या में करीब 45 लाख की वृद्धि हुई। यह संख्या 1.69 करोड़ से बढ़कर 2.14 करोड़ से अधिक हो गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में 1,69,58,380 मतदाता थे। 2022 के विधानसभा चुनाव तक यह आंकड़ा 2,14,99,804 तक पहुंच गया।

2024 के लोकसभा चुनाव में भी मतदाता आधार करीब 2.15 करोड़ रहा। हालांकि, इसी दौरान मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई। 2012 के विधानसभा चुनाव में 78.60 फीसदी मतदान हुआ था। यह 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 62.80 फीसदी रह गया। मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बावजूद मतदान का उत्साह कम हुआ है।

विदेश जाने की होड़
इसी अवधि में पंजाब के युवाओं में विदेश जाने की होड़ तेज हुई है। प्रवासन अध्ययनों के अनुसार कुल विदेश प्रवासन का 73.16 फीसदी हिस्सा 2016 के बाद का है। कनाडा 41.88 फीसदी के साथ पंजाबियों का सबसे पसंदीदा गंतव्य है। दुबई 16.25 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया 9.63 फीसदी के साथ अन्य प्रमुख गंतव्य हैं। 2016 के आसपास 75 हजार विद्यार्थी सालाना कनाडा जाते थे, जो 2022 से 2024 के बीच बढ़कर 1.35 लाख से 1.50 लाख हो गए।

उच्च शिक्षा पर असर और आर्थिक बोझ
विदेश जाने की इस दौड़ का असर राज्य की उच्च शिक्षा पर भी पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक लाख से अधिक विद्यार्थियों की कमी आई है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अध्ययनों के अनुसार ग्रामीण परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए 14,342 करोड़ रुपये का कर्ज लिया।

विदेश भेजने की लागत जुटाने के लिए 5,636 करोड़ रुपये की कृषि भूमि और घरेलू संपत्तियां बेची गईं। एक बच्चे को विदेश भेजना कई परिवारों के लिए लाखों रुपये की परियोजना बन चुका है। इसके बावजूद विदेश जाने की चाह लगातार बढ़ी है।

मतदाताओं की संख्या में वृद्धि का कारण
राजनीति के विशेषज्ञ प्रो कुणाल ने इस विरोधाभास पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि हजारों युवा विदेश जा रहे हैं, पर पंजाब की जनसांख्यिकी बदली है। चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों में हिमाचल और जेएंडके के लोगों की संख्या बढ़ी है।

लुधियाना, फतेहगढ़ साहब और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक शहरों में बाहरी प्रदेशों से लोग आकर बसे हैं। मतदाता सूची में नाम होना और चुनाव में मतदान करना अलग बातें हैं। विदेश में रहने वाले भारतीयों की मतदाता पात्रता कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। 

 

Aditya
Author: Aditya

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