Edition

अमेरिका को बड़ा झटका! ईरान ने गिराया रीपर ड्रोन, 1.3 अरब डॉलर का नुकसान

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

तेहरान 
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मंगलवार को दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मिसाइल से मार गिराया. यह ड्रोन खाड़ी में गिर गया. IRGC के अनुसार यह अब तक का 54वां ऐसा अमेरिकी रीपर है जिसे उन्होंने नष्ट किया है।  

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है. अमेरिकी ड्रोन यहां टैंकर एस्कॉर्ट और निगरानी के लिए लगातार उड़ान भरते हैं. ईरान का यह दावा क्षेत्रीय तनाव को फिर से बढ़ा सकता है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच फरवरी 2026 से चले आ रहे संघर्ष में ड्रोन और एयर डिफेंस मुकाबला मुख्य हिस्सा बन चुका है। 

अमेरिकी पक्ष ने अभी तक इस विशिष्ट घटना की पुष्टि या खंडन नहीं किया है, जो ऐसे दावों में आम बात है. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी से अब तक अमेरिका ने कम से कम 45 एमक्यू-9 रीपर खोए हैं. इसमें दुश्मन की फायरिंग, क्रैश, फ्रेंडली फायर और ईरान से दूर हुई घटनाएं भी शामिल हैं। 

प्रत्येक रीपर की कीमत लगभग 30 से 50 मिलियन डॉलर के बीच होती है, जिससे कुल नुकसान 1.3 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. ये ड्रोन न सिर्फ निगरानी बल्कि सटीक हमलों के लिए भी इस्तेमाल होते हैं. होर्मुज क्षेत्र में टैंकर सुरक्षा के आंख का काम करते हैं. इतने बड़े नुकसान ने अमेरिकी ड्रोन बेड़े पर दबाव डाला है। 

कांग्रेस रिपोर्ट्स में भी इसी आंकड़े का जिक्र है और बताया गया कि ऑपरेशनल रीपर की संख्या घटकर पहले के स्तर से काफी नीचे आ गई है. यह स्थिति दिखाती है कि सस्ते और लंबे समय तक उड़ने वाले ड्रोन भी उच्च रक्षा वाले इलाकों में आसानी से निशाना बन सकते हैं। 

ईरान की मजबूत होती एयर डिफेंस
ईरान ने पिछले सप्ताह ब्लूमबर्ग को बताया कि उसकी एयर डिफेंस क्षमता वसंत के संघर्ष के समय से 'बहुत ऊंचे स्तर' पर पहुंच गई है. IRGC का कहना है कि नए सिस्टम और इंटीग्रेटेड नेटवर्क की मदद से वे इन ड्रोनों को ट्रैक और नष्ट कर पा रहे हैं। 

वसंत में हुए युद्ध के दौरान ईरान की कई रक्षा प्रणालियां क्षतिग्रस्त हुई थीं, लेकिन अब मरम्मत और नए उपकरण जोड़कर कवरेज बढ़ाया गया है. यह दावा अमेरिका के लिए चिंता का विषय है क्योंकि रीपर जैसे प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखने के लिए ऊंचाई, रूट और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा बदलनी पड़ सकती है. दोनों पक्षों के बीच दावे-प्रतिदावे जारी हैं, लेकिन स्वतंत्र रूप से हर घटना की पुष्टि मुश्किल है। 

ये घटनाक्रम न सिर्फ सैन्य बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं. होर्मुज में तनाव बढ़ने से शिपिंग कम हो सकती है और तेल कीमतें प्रभावित हो सकती हैं. अमेरिका के लिए ड्रोन बेड़े का नुकसान भविष्य के अभियानों की योजना बदलने को मजबूर कर सकता है, जबकि ईरान इसे अपनी प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन मानता है. कुल मिलाकर यह संघर्ष दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में सस्ते यूएवी भी महंगे साबित हो सकते हैं जब दुश्मन की एयर डिफेंस मजबूत हो. दोनों पक्षों को तनाव कम करने के रास्ते तलाशने होंगे वरना क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ेगी। 

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!