भोपाल। मध्य प्रदेश में तबादला प्रक्रिया के अंतिम चरण के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई तबादला नीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले केवल निर्धारित कार्यकाल के आधार पर नहीं, बल्कि उनके कार्य प्रदर्शन (परफॉर्मेंस) के आधार पर तय किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन शासकीय सेवकों का प्रदर्शन बेहतर होगा, उन्हें तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उसी स्थान पर कार्य करने का अवसर दिया जा सकता है। वहीं जिनका कार्य संतोषजनक नहीं होगा, उन्हें तीन वर्ष पूरा होने का इंतजार किए बिना छह माह के भीतर भी स्थानांतरित किया जा सकेगा।
जानकारी के अनुसार वर्तमान तबादला नीति में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है, लेकिन अगले वर्ष की तबादला नीति को परफॉर्मेंस आधारित बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए विभागीय स्तर पर मानक तय किए जाएंगे।
इधर सरकार द्वारा तबादलों से प्रतिबंध हटाए जाने के बाद भी अधिकांश विभागों में अपेक्षित संख्या में तबादले नहीं हो पाए हैं। 15 जून तक तबादलों की समय-सीमा निर्धारित है, लेकिन कई विभागों ने अब तक न तो रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक की है और न ही व्यापक स्तर पर स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष की स्थिति देखी जा रही है।
वहीं नगरीय प्रशासन विभाग में कुछ तबादलों को लेकर मंत्रियों की नाराजगी भी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार कुछ अधिकारियों के तबादले विभागीय स्तर पर किए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची, जिसके बाद मामले को संबंधित मंत्री के स्तर पर देखने के निर्देश दिए गए।
एक जिले में पुलिस अधिकारियों के तबादलों को लेकर भी विवाद सामने आया है। प्रभारी मंत्री की सहमति के बिना किए गए स्थानांतरणों पर नाराजगी जताई गई और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रदेश में तबादलों की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, जबकि सरकार अब स्थानांतरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाती नजर आ रही है।









