Edition

ऐतिहासिक साक्ष्यों से बदल सकती है राम वन गमन पथ की रूपरेखा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

जगदलपुर.

भगवान राम के वनवास से जुड़ी मान्यताओं और बस्तर की ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने वाली राम वन गमन पथ परियोजना अब नए सिरे से तैयार हो सकती है। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना के मार्ग चयन और खर्च को लेकर विवाद उठे थे।

अब भाजपा सरकार परियोजना को ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पर्यटन विभाग ने दूसरे चरण के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में गठित समिति की रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा। इस समिति ने भगवान राम के वनगमन मार्ग से जुड़े स्थलों का अध्ययन किया था।

बस्तर संभाग में कांकेर के रामपुर जुनावनी, केशकाल और गढ़धनोरा को इस मार्ग से जोड़ने की बात है। इसके अलावा चित्रकोट, रामपाल, तीरथगढ़ और कोटमसर की गुफा भी प्रस्तावित स्थलों में शामिल हैं। दंतेवाड़ा में बारसूर और मां दंतेश्वरी मंदिर तथा सुकमा में रामाराम और इंजरम को भी इस परिपथ से जोड़ने की योजना है। पूर्व में मार्ग चयन और करोड़ों रुपये के खर्च को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिनकी जांच कराने का निर्णय भी लिया गया है। अब पर्यटन विभाग संशोधित प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजेगा। बड़ा सवाल यह है कि नई योजना में ऐतिहासिक तथ्यों को कितनी प्राथमिकता मिलती है और बस्तर के इन धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटन के लिहाज से कितना विकसित किया जाता है।

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!