सतना जिले में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रारंभिक जांच में 27 ऐसी महिलाओं की पहचान हुई है, जो शासकीय सेवा में रहते हुए भी योजना का लाभ ले रही थीं। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई है और अब पूरे जिले में लाभार्थियों के दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआती आंकड़ा हो सकता है, जांच आगे बढ़ने पर और भी बड़े खुलासे सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
जानकारी के अनुसार, ट्रेजरी से वेतन भुगतान प्रक्रिया के दौरान जब समग्र आईडी को वेतन खातों से लिंक किया गया, तब यह गड़बड़ी उजागर हुई। जांच में सामने आया कि कई महिलाएं एक तरफ सरकारी वेतन प्राप्त कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत हर महीने 1500 रुपए की राशि भी उनके खातों में पहुंच रही थी।
बताया गया कि चिन्हित 27 महिलाओं में से 16 नगर निगम क्षेत्र से जुड़ी कर्मचारी हैं। इन महिलाओं के खातों में अब तक योजना के तहत लाखों रुपए की राशि पहुंच चुकी है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि किन परिस्थितियों में इनके नाम योजना में शामिल हुए और क्या दस्तावेजों की जांच में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संबंधित निकायों से आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक खाते और सेवा संबंधी दस्तावेज तलब किए गए हैं। विभागीय समितियां हर प्रकरण की अलग-अलग जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित महिलाएं योजना में नाम जुड़ने के बाद सरकारी सेवा में आईं या पहले से नौकरी में थीं। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं जैसे कुछ वर्गों को शासन द्वारा विशेष छूट दिए जाने के बिंदु पर भी परीक्षण किया जा रहा है।
गौरतलब है कि योजना की शुरुआत सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर हुई थी, जिसके कारण प्रारंभिक स्तर पर दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन नहीं हो पाया था। अब तकनीकी मिलान और समग्र आईडी लिंकिंग के बाद कई विसंगतियां सामने आने लगी हैं।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुटा है। यदि अपात्र लाभ लेना प्रमाणित होता है तो संबंधित हितग्राहियों से राशि वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। जिले में चल रही इस जांच ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आखिर अभी और कितने ऐसे मामले सामने आना बाकी हैं।









