सतना में सहकारी समिति प्रबंधक पर EOW की दो FIR, 12 घंटे की जांच में ₹92.16 लाख की संपत्ति उजागर; आय से 426% अधिक होने का दावा…

सतना जिले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने नागौद ब्लॉक की सेवा सहकारी समिति अमकुई के प्रभारी प्रबंधक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। मामला आय से अधिक संपत्ति और खाद वितरण में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। शनिवार को EOW की टीम ने सिजहटी स्थित उनके आवास पर करीब 12 घंटे तक जांच की। एजेंसी के मुताबिक, इस दौरान ₹92.16 लाख की संपत्ति और खर्च से संबंधित जानकारी सामने आई, जो आकलन के अनुसार उनकी ज्ञात वैध आय से 426 प्रतिशत अधिक है।
12 घंटे की जांच में मकान, वाहन और जेवरात की जानकारी…..EOW के एसपी अरविंद सिंह ठाकुर के अनुसार, सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल वर्ष 2006 में विक्रेता के पद पर नियुक्त हुए थे और 2020 में प्रभारी प्रबंधक बने। जांच एजेंसी ने जनवरी 2007 से सितंबर 2025 तक उनकी वैध आय लगभग ₹17.51 लाख आंकी है।
जांच के दौरान ₹57.68 लाख के खर्च, ₹22.50 लाख के भूमि संबंधी दस्तावेज और ₹11.97 लाख के सोने के आभूषणों की जानकारी सामने आई। इसके अलावा नागौद में लगभग 2,200 वर्गफीट का मकान, कार, ट्रैक्टर और दो बाइक होने की जानकारी भी मिली है। बेटे की दिल्ली में पढ़ाई पर लाखों रुपए खर्च किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
छह बैंक खातों और बीमा पॉलिसियों की जांच जारी….EOW के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में कुल ₹92.16 लाख की संपत्ति और खर्च का आकलन किया गया है। यह राशि उनकी ज्ञात वैध आय से काफी अधिक बताई गई है। एजेंसी अब उनके छह बैंक खातों और बीमा पॉलिसियों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद संपत्ति और आय के वास्तविक अंतर को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।
खाद वितरण में गड़बड़ी को लेकर दूसरी FIR…..प्रभारी प्रबंधक के खिलाफ दूसरी FIR अमकुई सेवा सहकारी समिति में खाद वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर दर्ज की गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि समिति में 194 वास्तविक किसानों के साथ 122 कथित फर्जी किसानों के नाम पीओएस मशीन में दर्ज कर खाद की कालाबाजारी की गई।
यूरिया और DAP की मात्रा में कथित हेरफेर…..EOW के अनुसार, वास्तविक किसानों के परमिट और रसीदों की कार्बन प्रतियों में कथित तौर पर काट-छांट कर 10 से 20 बोरी यूरिया और डीएपी अतिरिक्त दर्ज किया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए ऋण समायोजन कराया गया और फर्जी स्टॉक रजिस्टर भी तैयार किए गए।
एजेंसी अब खाद वितरण से जुड़े दस्तावेजों, किसानों के रिकॉर्ड और स्टॉक संबंधी जानकारी की जांच कर रही है। दोनों मामलों में दर्ज FIR के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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