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सदन में हंगामा करने पर सुखपाल खैरा पर कार्रवाई, विधानसभा सत्र से हुए निलंबित

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चंडीगढ़.

पंजाब विधानसभा के शून्यकाल में शुक्रवार को नशे, गैंगस्टरवाद और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के कथित असंसदीय व्यवहार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खैरा के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव पेश करते हुए उन्हें विधानसभा के मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने की मांग की। जिसे स्वीकार कर लिया गया।

चीमा ने आरोप लगाया कि चेयर की बार-बार चेतावनी के बावजूद खैरा सदन के वेल में आए, चेयर के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और कार्यवाही में बाधा डाली। उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग भी उठाई। चीमा ने सदन में कहा कि विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के दौरान कांग्रेस सदस्यों की ओर से इस्तेमाल की गई भाषा पूरे सदन ने देखी। उन्होंने पंजाब विधानसभा की कार्यविधि एवं कार्य संचालन नियमावली के नियम 7(2) का हवाला देते हुए कहा कि खैरा ने चेयर के आदेशों की अनदेखी की और सदन का कीमती समय बर्बाद किया। उनके मुताबिक, इस तरह का व्यवहार सदन की गरिमा के खिलाफ है और अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

‘बंधुआ मजदूर’ कहने पर भी जताई आपत्ति
चीमा ने खैहरा की कथित टिप्पणियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सदन में किसी को चप्पल चाटने वाला और किसी को बंधुआ मजदूर कहने जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे गरीबों, मजदूरों और अनुसूचित जाति समुदाय का अपमान करार दिया। चीमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता ऐसी शब्दावली के माध्यम से दलित समाज का अपमान कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि विधानसभा में चुनकर आने वाले जनप्रतिनिधि केवल अपनी पार्टी का नहीं, बल्कि उन लोगों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्होंने उन्हें वोट देकर भेजा है। इसलिए किसी विधायक के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना जनता के जनादेश का अपमान भी है। उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग करते हुए कहा कि दलितों और गरीबों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सदन को गंभीर रुख अपनाना चाहिए। चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने की घोषणा का भी उल्लेख किया और इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

अयाली ने नशे पर तीनों सरकारों को घेरा
शून्यकाल में अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने पंजाब में नशे की समस्या पर अकाली-भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकारों को घेरा। उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार के समय नशे पर रोक लगाने में नाकामी रही और उस समय अकाली दल भी सरकार का हिस्सा था। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के 70 गांवों में खेल पार्क और मैदान बनवाने का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को खेलों से जोड़ना नशे से बचाव का एक रास्ता है। अयाली ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुटका साहिब की सौगंध खाकर नशा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन समस्या बनी रही। उन्होंने मौजूदा आप सरकार के ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के प्रचार पर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े-बड़े बोर्ड लगाने के बावजूद नशा खत्म नहीं हुआ। उन्होंने सीमा पार से नशे की तस्करी, केंद्र सरकार की जिम्मेदारी और ट्रामाडोल जैसी नशीली दवाओं की गोलियों की बिक्री पर भी सवाल उठाए। अयाली ने शेरों गांव की घटना का जिक्र करते हुए बोटिस सिंह शेरों के साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया।

गैंगस्टर परिवार को टिकट देने पर उठे सवाल
विधायक हरमीत सिंह संधू ने गैंगस्टरवाद का मुद्दा उठाते हुए तरनतारन उपचुनाव का संदर्भ दिया। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल की ओर से एक नामी गैंगस्टर के परिवार से जुड़ी महिला को टिकट देने और बाद में उसे हलके की जिम्मेदारी सौंपने पर सवाल खड़े किए। संधू ने दावा किया कि संबंधित गैंगस्टर पर तरनतारन क्षेत्र में तीन मौजूदा सरपंचों की हत्या कराने सहित गंभीर आरोप हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वसनीय सूत्रों से गैंगस्टर के कनाडा में पकड़े जाने की जानकारी मिली है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई। इस तरह शून्यकाल में एक ओर खैहरा के कथित असंसदीय व्यवहार को लेकर निलंबन और कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव का मुद्दा उठा, वहीं दूसरी ओर नशे और गैंगस्टरवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव भी चर्चा में रहा।

Aditya
Author: Aditya

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