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गुरुग्राम और नूंह में अब चुन सकेंगे बिजली कंपनी, ₹4,717 करोड़ निवेश करेगी इलेवन पावर

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चंडीगढ़
गुरुग्राम और नूंह जिले में अब निजी कंपनी इलेवन पावर भी बिजली की सप्लाई करेगी। बिजली मंत्री अनिल विज और कर्मचारी यूनियनों के विरोध को दरकिनार करते हुए हरियाणा राज्य विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने निजी कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही हरियाणा के बिजली क्षेत्र में नया अध्याय शुरू हो गया है।

विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत जारी इस फैसले के बाद अब दक्षिण हरियाणा में सरकारी बिजली निगम दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम का एकाधिकार समाप्त हो गया है। गुरुग्राम और नूंह के उपभोक्ताओं को अब मोबाइल नेटवर्क की तर्ज पर अपनी पसंद की बिजली वितरण कंपनी चुनने का विकल्प मिलेगा।

निजी कंपनी इलेवन पावर इन दोनों जिलों में लगभग 4717 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पूंजीगत निवेश कर अपना स्वतंत्र और आधुनिक बिजली नेटवर्क स्थापित करेगी। कंपनी ने इस परियोजना के लिए शीर्ष इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलाजी कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।

कंपनी की योजना के अनुसार, इस नए नेटवर्क को हरित ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी), सोलर, विंड, स्मार्ट-मीटरिंग टेक्नोलाजी और एडवांस्ड ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस किया जाएगा। इससे न केवल औद्योगिक और वाणिज्यिक इकाइयों को बिना ट्रिपिंग के निर्बाध बिजली मिलेगी, बल्कि डीजल जनरेटरों पर निर्भरता घटने से प्रदूषण में भी बड़ी कमी आएगी।

किसी को कनेक्शन देने से मना नहीं कर सकेगी कंपनी
विनियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस प्राप्त करने वाली निजी कंपनी पर यूनिवर्सल सर्विस आब्लिगेशन लागू होगा, जिसके तहत वह किसी भी उपभोक्ता को कनेक्शन देने से इनकार नहीं कर सकती है। कंपनी अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से गुरुग्राम (शहर, सब-अर्बन, मानेसर, सोहना) और नूंह जिले के शहरी, ग्रामीण तथा कृषि क्षेत्रों में अपना नेटवर्क फैलाएगी। आयोग ने उपभोक्ताओं की आसानी के लिए एक पारदर्शी माइग्रेशन प्रोटोकाल भी निर्धारित किया है।

पिछले दरवाजे से बिजली का निजीकरण: संपत सिंह
पूर्व मंत्री और इनेलो संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने इसे सार्वजनिक बिजली क्षेत्र और आम नागरिक पर सुनियोजित हमला बताया है। उन्होंने कहा कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का निर्णय कोई सामान्य नियामकीय आदेश नहीं है। वास्तव में यह पिछले दरवाजे से किया जा रहा निजीकरण है।

यह बिजली व्यवसाय के सबसे लाभदायक हिस्से को निजी हितों के हवाले करने की पूर्व नियोजित प्रक्रिया है, जबकि सार्वजनिक बिजली वितरण कंपनी पर ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि उपभोक्ताओं, रियायती श्रेणियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने का पूरा बोझ छोड़ दिया जाएगा। सरकार को जवाब देना चाहिए कि हाल ही में गठित हुई और बिजली वितरण के क्षेत्र में सीमित प्रमाणित अनुभव रखने वाली कंपनी को राज्य के सबसे अधिक लाभदायक बिजली आपूर्ति क्षेत्र में 25 वर्षों का लाइसेंस देने की अनुमति क्यों दी गई।

संयुक्त मोर्चा ने बुलाई आपात मीटिंग
हरियाणा पावर इंप्लाइज एवं इंजीनियर्स संयुक्त मोर्चा ने मामले को लेकर करनाल में आपात बैठक बुलाई है। फैसले को काला दिन करार देते हुए संयुक्त मोर्चा के शीर्ष नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार और आयोग मिलकर बिजली निगमों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रच रहे हैं।

औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को निजी कंपनी के हवाले करना सीधे तौर पर सरकारी बिजली निगमों की कमर तोड़ने जैसा है। आने वाले समय में बाकी जिलों को भी प्राइवेट कंपनियों के हवाले किया जा सकता है। निजी कंपनी केवल लाभकारी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति करेगी, जबकि घाटे वाले ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों का बोझ सरकारी निगमों पर छोड़ दिया जाएगा। इस फैसले से 40 हजार बिजली कर्मचारियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Aditya
Author: Aditya

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