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RSS रैलियों पर रोक को लेकर मद्रास हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को लगाई फटकार

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चेन्नई
 मद्रास हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को तमिलनाडु में रैलियां करने की इजाजत देने का आदेश जारी किया है. अदालत ने इस तरह के आयोजनों के लिए कुछ निर्देश भी जारी किए हैं, जिसमें यह बताया गया है कि रैलियों के दौरान क्या करने की अनुमति है और क्या करने की मनाही है. कोर्ट ने यह आदेश भी दिया कि यदि आरएसएस पुलिस द्वारा लगाई गई शर्तों का उल्लंघन करता है, तो पुलिस को उचित कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। 

आरएसएस ने अपने स्थापना के 100 वर्ष (शताब्दी वर्ष) पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे भारत में रैलियां निकालने का फैसला किया है. इसी के तहत तमिलनाडु में, संगठन ने आगामी 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को 128 जगहों पर रैलियां आयोजित करने के लिए पुलिस से अनुमति मांगी थी. चूंकि उनकी इस मांग पर पुलिस द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया, इसलिए आरएसएस के राज्य सचिव जगदीशन ने मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। 

न्यायमूर्ति लक्ष्मी नारायणन की बेंच में इस मामले पर दोबारा सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील ने दलील दी, "हमने चेन्नई में 400 और बाकी के अन्य जिलों में 100-100 प्रतिभागियों के साथ रैली निकालने की अनुमति मांगी थी. इसके बावजूद, पुलिस ने अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए हमें अनुमति देने से इनकार कर दिया। 

पुलिस का पक्ष रखते हुए एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने कहा, "अदालत के पिछले निर्देश के बाद भी, केवल 93 जगहों के लिए ही आवेदन जमा किए गए हैं. इनमें से 16 जगहों के लिए शामिल होने वाले लोगों की संख्या और 38 जगहों के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या की जानकारी दी गई है. बाकी के जिलों के लिए अभी तक कोई आवेदन नहीं दिया गया है. इसके अलावा, जिन जगहों के लिए अनुमति मांगी गई है, उनमें से कुछ भारी ट्रैफिक वाले इलाके हैं, जिससे अनुमति देने में मुश्किलें आ रही हैं। 

इन दलीलों को सुनने के बाद, सुनवाई कर रहे जज ने टिप्पणी की कि रैलियों की अनुमति न देकर सरकार एक तरह से आरएसएस (RSS) को परोक्ष रूप से प्रचार दे रही है. इसके साथ ही, कोर्ट ने आरएसएस को 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को रैलियां व बैठकें आयोजित करने की अनुमति दे दी। 

Aditya
Author: Aditya

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