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शारदीय नवरात्रि: सच्ची आराधना तभी, जब नारी सुरक्षित और सम्मानित हो !…

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शारदीय नवरात्रि: सच्ची आराधना तभी, जब नारी सुरक्षित और सम्मानित हो !

नौ दिन माँ दुर्गा की पूजा, कन्या पूजन और शक्ति के जयकारे!! लेकिन एक सवाल आज भी हमारे समाज के सामने खड़ा है जिस देश में नारी को देवी मानकर पूजा जाता है, वहाँ आज भी बेटियाँ असुरक्षित, बहनें भयभीत और बहुएँ प्रताड़ित क्यों हैं? क्या हमारी आस्था केवल मंदिरों तक सीमित रह गई है?

शारदीय नवरात्रि केवल माँ दुर्गा की उपासना का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर साहस जगाने और समाज को अन्याय से मुक्त करने का संदेश भी है। देवी की आराधना तभी सार्थक है, जब नारी के प्रति हमारा व्यवहार भी श्रद्धा, संवेदना और सम्मान से भरा हो।

जिस बेटी को कन्या मानकर पूजते हैं, उसे सुरक्षित भविष्य दें। जिस बहन की रक्षा का वचन देते हैं, उसकी स्वतंत्रता और सपनों का सम्मान करें। जिस बहू को घर की लक्ष्मी कहते हैं, उसे दहेज, भेदभाव और अत्याचार नहीं, बल्कि समानता, अपनापन और अधिकार दें।

बेटियों को अपनी सुरक्षा के लिए सशक्त बनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी बेटों को स्त्रियों का सम्मान करना, उनकी सहमति का महत्व समझना और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना सिखाना भी है।

याद रखिए, नारी का सम्मान कोई उपकार नहीं, उसका अधिकार है; और उसकी सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

आइए, इस नवरात्रि संकल्प लें कि हम केवल माँ दुर्गा के सामने शीश नहीं झुकाएँगे, बल्कि हर स्त्री के सम्मान की रक्षा के लिए भी खड़े होंगे। किसी महिला के साथ अन्याय होते देखकर मौन नहीं रहेंगे और बदलाव की शुरुआत अपने घर, अपनी सोच और अपने व्यवहार से करेंगे।

माँ दुर्गा की सच्ची आराधना तभी है, जब कोई बेटी भय में न जिए, कोई बहन अपमान न सहे, कोई बहू अत्याचार न झेले और हर स्त्री आत्मसम्मान के साथ स्वतंत्र एवं सुरक्षित जीवन जी सके।

इस नवरात्रि केवल देवी की पूजा नहीं, नारी के सम्मान, समानता और सुरक्षा का संकल्प लें। क्योंकि देवी की शक्ति को पूजना तभी सार्थक है, जब हम जीवित नारी की गरिमा ,अस्मिता और उसके अस्तित्व को भी उतना ही महत्व दें।

🙏जय माता दी!🙏🏼

—– मंजरी

Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

journalist

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