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पुतला जला, लेकिन चर्चा विरोध के अंदाज की! वायरल वीडियो ने छेड़ी बहस, सार्वजनिक आचरण और विरोध के तरीके पर उठे सवाल……

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सतना। बीते दिनों हुए एक पुतला दहन कार्यक्रम का वीडियो इन दिनों जिले से लेकर प्रदेश तक चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर लोग पूछ रहे हैं कि आखिर विरोध का यह कैसा अंदाज था, जहां मुद्दे से ज्यादा चर्चा प्रदर्शन के तरीके की होने लगी?

राजनीति में विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। पुतला दहन भी विरोध दर्ज कराने का पुराना तरीका है, लेकिन इस बार वीडियो में दिखाई दिए दृश्य और उस दौरान सुनाई दी हंसी ने लोगों का ध्यान खींचा है। अब चर्चा इस बात की हो रही है कि विरोध का संदेश कितना पहुंचा और उसका अंदाज लोगों के बीच किस रूप में सामने आया।

वीडिओ मे देखें तो पुतला दहन कार्यक्रम में युवा ही नहीं, वरिष्ठ लोग भी शामिल थे। वीडियो में कुछ ऐसे चेहरे भी नजर आए, जिन्हें शहर के लोग सम्मान की नजर से देखते आए हैं। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे है, कि सार्वजनिक जीवन में रहने नेताओं की जिम्मेदारी आखिर क्या होती है? क्या उनकी भूमिका केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित है, या उनके आचरण से समाज को मिलने वाले संदेश की जिम्मेदारी भी उनकी है?

सतना की पहचान आपसी भाईचारे, सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक मर्यादा से रही है। यहां लोग एक-दूसरे को केवल राजनीतिक विचारधारा से नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों से भी पहचानते हैं। ऐसे में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम का वीडियो संस्कृति और संस्कारों पर बहस छेड़ दे, तो यह विचार करने का विषय जरूर है।

व्यंग्य यही है कि पुतला तो जल गया, लेकिन सुर्खियां प्रदर्शन के अंदाज को मिल गईं। मंशा क्या थी, यह संबंधित लोग ही बता सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में पद के साथ व्यवहार की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। आखिर विरोध ऐसा हो कि चर्चा मुद्दे की हो, न कि शहर की संस्कृति पर सवाल उठने लगें…..

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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