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ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप, आग से महिला की मौत; 18 दिन पहले कलेक्टर को दिया था ज्ञापन, डॉक्टर ने आरोपों को नकारा….

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रीवा में आग से महिला की मौत, 18 दिन पहले कलेक्टर से की थी शिकायत: कंधे के ऑपरेशन में लापरवाही का लगाया था आरोप; डॉक्टर ने नकारे दावे…

रीवा के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में अजगरहा रोड स्थित किराए के मकान में आग लगने से मिथिलेश सिंह की मौत के मामले में नया पहलू सामने आया है। मौत से 18 दिन पहले, 24 सितंबर को महिला ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर संजय गांधी अस्पताल के डॉक्टर शुभम मिश्रा पर कंधे के ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाया था। उसने शिकायत में कहा था कि करीब 10 महीने पहले ऑपरेशन कराने के बाद भी उसे दर्द से राहत नहीं मिली। महिला ने समस्या का समाधान नहीं होने पर आत्महत्या करने की चेतावनी भी दी थी।
घटना 9 और 10 अक्टूबर की दरमियानी रात की है। अजगरहा रोड स्थित मकान में आग लगने की सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। मकान का दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिस ने कटर की मदद से दरवाजा कटवाकर महिला को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतका तिलखन की निवासी थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
10 महीने पहले कराया था कंधे का ऑपरेशन…24 सितंबर को कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में मिथिलेश ने बताया था कि डॉक्टर शुभम मिश्रा ने करीब 10 महीने पहले उसके कंधे का ऑपरेशन किया था। महिला का आरोप था कि ऑपरेशन के दौरान नट-बोल्ट और अन्य उपकरण लगाए जाने के बावजूद उसका दर्द कम नहीं हुआ। समय के साथ परेशानी बढ़ती गई और उसे दोबारा इलाज कराने की जरूरत पड़ी।
शिकायत के मुताबिक, आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने पहुंचने पर उसे 50 हजार रुपए खर्च होने की बात कही गई थी। इसमें 40 हजार रुपए की रॉड और प्लेट तथा 10 हजार रुपए डॉक्टर के लिए बताए जाने का आरोप लगाया गया था। महिला ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने का आग्रह किया था।
एम्स भोपाल में इलाज को लेकर भी किया था दावा...मिथिलेश ने अपने ज्ञापन में दावा किया था कि कंधे की परेशानी बढ़ने पर वह भोपाल स्थित एम्स में इलाज कराने गई थी। उसके मुताबिक, वहां डॉक्टरों ने पहले किए गए इलाज को गलत बताया था। महिला ने कंधे की स्थिति गंभीर होने और उसे ठीक करने में मुश्किल आने की बात भी कही थी।
हालांकि, एम्स के डॉक्टरों ने वास्तव में क्या कहा था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड या अस्पताल के आधिकारिक बयान से होना बाकी है।
शिकायत में आत्महत्या की दी थी चेतावनी..महिला ने 24 सितंबर को कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में अपनी परेशानी बताते हुए चेतावनी दी थी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह आत्महत्या कर लेगी। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया था कि संजय गांधी अस्पताल में दोबारा इलाज कराने पहुंचने पर उसे वापस लौटा दिया गया था।
ज्ञापन देने के करीब 18 दिन बाद महिला की आग में मौत हो गई। इसके बाद ऑपरेशन में कथित लापरवाही के आरोप और महिला की पहले दी गई चेतावनी का मामला सामने आया है। हालांकि, ऑपरेशन में लापरवाही हुई थी या नहीं और महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।
डॉक्टर शुभम मिश्रा ने आरोपों को बताया निराधार..डॉक्टर शुभम मिश्रा ने महिला की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने मामले में विस्तार से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। फिलहाल ऑपरेशन में कथित लापरवाही के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई अंतिम जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
पुलिस कर रही घटना की जांच…विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्र नाथ शर्मा के मुताबिक, अजगरहा रोड स्थित किराए के मकान में आग लगने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण उसे कटर से कटवाया गया और महिला को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
थाना प्रभारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया महिला द्वारा खुद आग लगाने की आशंका है। हालांकि, घटना की वास्तविक वजह और मौत की परिस्थितियां जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।
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Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

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